Home Featured भारतीय पत्रकारिता का इतिहास गौरवमयी एवं सामाजिक सरोकार से संबद्ध : डॉ मुश्ताक।
February 15, 2020

भारतीय पत्रकारिता का इतिहास गौरवमयी एवं सामाजिक सरोकार से संबद्ध : डॉ मुश्ताक।

दरभंगा : पत्रकारिता अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है, जिसमें चुनौतियों के साथ ही असीम संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र में युवाओं के सपनों को पंख लग सकते हैं। गद्य के विकास के साथ ही पत्रकारिता का भी विकास हुआ।स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अखबार निकालना बहुत ही खतरनाक था। फिर भी उस समय पत्रकारिता करना मिशन था,पर आज फैशन बन गया है। उत्तर पूंजीवाद के इस युग के मूल में भाव कि नहीं,बल्कि अर्थ की प्रधानता बढ़ी है।उक्त बातें विश्वविद्यालय हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो चंद्रभानु प्रसाद सिंह ने सीएम कॉलेज में कैरियर ओरिएंटेड प्रोग्राम के तहत संचालित पत्रकारिता के सर्टिफिकेट कोर्स सत्र 2019-20 के नामांकित छात्रों के वर्गारंभ समारोह एवं ‘पत्रकारिता की बढ़ती भूमिकाएं एवं संभावनाएं’ विषयक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में कहा।उन्होंने कहा कि आज प्रशिक्षित पत्रकारों की अत्यधिक जरूरत है। समाज और अखबारों के बीच सोशल मीडिया काफी सक्रिय हुआ है, जिसकी खबरों का कोई तर्कपूर्ण प्रमाण नहीं होता। इस कारण खबरों की विश्वसनीयता खंडित हुई है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को सफल पत्रकार बनने की गुर सिखाते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य डॉ मुश्ताक अहमद ने कहा कि भारतीय पत्रकारिता का इतिहास गौरवमयी एवं सामाजिक सरोकार से संबंध रहा है। 1857 से 1947 तक के स्वतंत्रता संग्राम में हमारी पत्रकारिता राष्ट्रभक्ति,एकता व अखंडता तथा सांस्कृतिक विरासत की रक्षक रही है,पर आज यह दिग्भ्रमित हो रही है। व्यवसायीकरण के कारण यह अपने मूल उद्देश्यों से भटक गई है,जो चिंतनीय है। प्रधानाचार्य ने कहा कि पत्रकारिता मरुभूमि में नाव चलाने जैसा कार्य है। सच्चे पत्रकारों का कोई धर्म व जाति नहीं होता,बल्कि वे संत सदृश होते हैं,जिनको किसी के प्रति ईर्ष्या-द्वेष या लोभ- लालच नहीं होता।पत्रकारिता उजाला है जो अपना बेहतर प्रभाव समाज पर जरूर दिखाता रहा है।
विषय प्रवेश कराते हुए पत्रकारिता के शिक्षक डॉ प्रीतम कुमार मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता समाज व सरकार के बीच सच्चाई रखने का अच्छा माध्यम है। आज खबरों के कई स्रोत उपलब्ध हैं। व्यवस्था बढ़ने के साथ ही चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। संगोष्ठी का विषय समसामयिक एवं समाजोपयोगी है।उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारिता करने के साथ ही पत्रकार बनाने का भी मुझे सुअवसर मिला।विशिष्ट अतिथि के रूप में पत्रकारिता के शिक्षक प्रो संतोष दत्त झा ने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।धर्य और लक्ष्य के प्रति समर्पण से ही बड़ी से बड़ी उपलब्धियों को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने छात्रों को बेहतर पत्रकार बनाने हेतु हरसंभव सहायता का संकल्प व्यक्त किया।
सम्मानित अतिथि के रूप में उर्दू के प्राध्यापक डॉ अब्दुल हैइ ने कहा कि पत्रकारों को सच्चाई के साथ ही भाषा पर पूरी पकड़ तथा विषय की गहन जानकारी आवश्यक है। सफल पत्रकारिता हेतु छोटी-बड़ी सभी खबरों पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
मुख्य वक्ता के रूप में पत्रकारिता के शिक्षक ललित झा ने कहा कि मिथिला सांस्कृतिक राजधानी है। पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि शौक है। यह मात्र वृत्ति नहीं,बल्कि प्रवृत्ति है। पहले धन बेहतर सामाजिक- पारिवारिक जीवन जीने का मात्र साधन होता था, पर आज यह हमारा साध्य बन गया है।पत्रकारिता को संवेदनशीलता,जागरूकता, सूचनात्मकता,वस्तुनिष्ठता और विषयनिष्ठता की जरूरत है।
छात्रों की ओर से माधवी कुमारी,मो आफताब आलम, मो मोवाज हुसैन,नीरज कुमार तथा जयप्रकाश कुमार साहू आदि ने विचार व्यक्त किया,जिन्हें प्रमाण पत्र व मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही 2018-19 के छात्र-छात्राओं को 15 दिवसीय प्रशिक्षण प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। इस अवसर पर प्रो इंदिरा झा, प्रो मंजू राय,डा मीनाक्षी राणा, डा संजीत कुमार झा, डॉ प्रीति त्रिपाठी,डा शैलेंद्र श्रीवास्तव, डॉ सुधांशु कुमार,डा रूपेंद्र झा, अमरजीत कुमार, राकेश कुमार, गोविंद कुमार,काजल कुमारी,जगजीत तथा विष्णु कांत सहित 80 से अधिक व्यक्ति उपस्थित थे।कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ से किया गया, जबकि संगोष्ठी का उद्घाटन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। आगत अतिथियों का स्वागत एवं कार्यक्रम का संचालन पत्रकारिता पाठ्यक्रम के समन्वयक डॉ आर एन चौरसिया ने किया,जबकि धन्यवाद ज्ञापन  रीता दुबे ने किया।

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