Home Featured पुलिस और डॉक्टर की भिंड़त में फिर भारी पड़ा डॉक्टरों के हड़ताल का दवाब, आरोपी एएसआई निलंबित।
3 weeks ago

पुलिस और डॉक्टर की भिंड़त में फिर भारी पड़ा डॉक्टरों के हड़ताल का दवाब, आरोपी एएसआई निलंबित।

दरभंगा: कहते हैं जब खुद पर आती तो दर्द झलके बिना नही रह पाता। जब डॉक्टर के साथ पुलिस वाले कि भिड़त हुई और आरोपी पुलिस कर्मी पर कार्रवाई करनी पड़ी तो वरीय अधिकारी का भी दर्द छलक पड़ा। परंतु डॉक्टरों के साथ जनता के विवाद का इतिहास पुराना रहा है। इसके लिए ज्यादा दूर जाने की जरूरत नही, डीएमसीएच का उदाहरण ही काफी है। आमजन को अस्पताल से लेकर सड़कों पर दौड़ा कर, मुहल्लों में घुसकर पीटने तक के मामले आ चुके हैं। पर हमेशा कार्रवाई की जद में आमजन ही आये हैं, कोई डॉक्टर नही। भले ही मीडिया ट्रायल डॉक्टर की गलती भी क्यों न दिखाया हो, पर एसोसिएशन के दवाब के सामने हमेशा कारवाई आमजन पर ही हुई है।परंतु शनिवार को एक एसएसआई के साथ मामला होने उनपर कारवाई पर वरीय अधिकारी को भी मीडिया ट्रायल भी दोषी दिखने लगा।

फिलहाल अपने पुराने छवियों से निकलकर इनदिनों कोरोना महामारी से लड़ने में डॉक्टर और पुलिसकर्मी दोनो योद्धाओं की भूमिका में हैं। परंतु शनिवार को इन दो योद्धाओं की भिंड़त आपस मे ही हो गयी। डॉक्टर और पुलिस दोनो आमने सामने हो गए। हालांकि पुलिस की छवि को लेकर मीडिया ट्रायल में हमेशा की तरह पुलिस का पक्ष कमजोर पड़ा और डॉक्टरों की हड़ताल समाप्त करवाने केलिए प्रारंभिक शिकायत के आधार पर एसएसपी द्वारा आरोपी एएसआई को निलंबित किया गया।
मामला जिले के जाले थानाक्षेत्र का है। गैंगरेप के आरोपियों की तलाश में पुलिस लगातार रातभर छापेमारी कर 5 में से 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर सुबह 7 बजे उन आरोपियों की मेडिकल जांच करवाने जाले रेफरल अस्पताल गये जहां यह वाकया घटा। रात भर छापेमारी की कड़ी मशक्कत के बाद जाले थाना के एएसआई परिजन पासवान सुबह तीन चार सिपाहियों के साथ चारो आरोपियों को लेकर जाले रेफरल अस्पताल पहुँचे। वहां उपस्थित डॉ0 रामप्रीत राम ने आरोपियों को मास्क पहनाने और सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करने को कहा। एएसआई श्री पासवान ने डॉक्टर से ही मास्क उपलब्ध करवा देने को कहा। इस पर डॉ0 राम भड़क गए और पुलिस को आरोपियों को मास्क पहना कर लाने को कहा। एएसआई श्री पासवान ने उन्हें समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि आरोपियों को कोर्ट में भी प्रस्तुत करना है। पर डॉक्टर साहब अड़ गए। इसपर रातभर छापेमारी करके चार आरोपियों को पकड़ने वाले एएसआई श्री पासवान ने भड़क कर थोड़ा तेज आवाज में उनसे जांच करने की बात की। डॉक्टर ने एएसआई को औकात में रहने की चेतावनी दे दी। बस इसी पर दोनो तरफ से गर्मी देखने को मिली। डॉक्टर को साउंडलेस सीसीटीवी लगे होने की बात मालूम थी। पर एसएसआई को इसबात का ख्याल नही था। तू तू मैं मैं से बात हाथापाई पर आ गयी।
इस घटना के बाद अस्पताल के सावस्थ्य कर्मियों ने काम ठप कर हड़ताल कर दिया। पीड़ित डॉक्टर रामप्रीत राम ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के नाम आवेदन दिया जिसे प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा थाना को अग्रसारित किया गया।
मामला मीडिया में एकतरफा पुलिस की गुंडागर्दी चलने के कारण जांच की प्रक्रिया शुरू होने के पहले प्रारम्भिक आधार पर ही एसएसपी ने एएसआई को निलंबित कर दिया।
हालांकि यह दोनो पक्षों के लिए सोचनीय विषय जरूर है क्योंकि दोनों कोरोना कर्मवीर के रूप में कार्य कर रहे हैं। सामान्य दिनों से ज्यादा इनदिनों दवाब में डॉक्टर और पुलिस कार्य कर रहे हैं। आमजन पहली बार नकारात्मक छवि को भुलाकर इनके कार्य को सैल्यूट कर रही है। ऐसे में दवाब के साथ साथ एक बड़ा मौका भी जरूर है कि इस विपदा की घड़ी में जनता की नजर में अपनी छवि सकरात्मक बनाये।
पुलिस के साथ हुई कारवाई पर पुलिस के वरीय अधिकारियों का दर्द भी झलकता दिखा। डॉक्टरों के साथ उनका एसोशिएशन तत्परता से खड़ा हो जाता है। डीएमसीएच में अक्सर मरीजो एवं परिजनों के साथ दुर्वव्यवहार की खबरें आती रहती हैं। प्रत्युत्तर में यदि कोई कुछ करे तो तुरंत काम ठप करा दिया जाता है और प्रशासन को झुकना पड़ता है। जूनियर डॉक्टर्स की एक भिड़ंत बेंता ओपी से पुलिस वाले की लाश उठाने कर लाने की विवाद पर भी 2014 में हुआ था। उस समय तत्कालीन एएसपी आईपीएस कुमार आशीष जो वर्तमान में किशनगंज के एसपी हैं, ने इसे गम्भीरता से लेते हुए कार्रवाई की इच्छाशक्ति जतायी थी। 21 दिनों में उनका ट्रांसफर दरभंगा से हो गया था। कई बार जूनियर डॉक्टरों द्वारा सड़कों पर, मुहल्लों में घुसकर मारपीट किया गया। परंतु एसोसिएशन के दवाब में आजतक कोई कार्रवाई नही हुई।
उक्त बातें उधृत इसलिए करना आवश्यक है क्योंकि एक पुलिस कर्मी के साथ मामला होने पर वरीय अधिकारियों का दर्द झलकता दिखा है। पर शायद न जाने कितने मामले डॉक्टरों द्वारा आमजनो के साथ हुआ है भुगतना आमजन को ही पड़ा है। डॉक्टर के विरुद्ध कारवाई एसोशिएशन के दवाव में दबकर रह जाती है।

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