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3 weeks ago

मास्क निर्माण में जुटी जीविका से जुड़ी महिलाएं, डीएम ने कार्य को किया प्रोत्साहित।

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दरभंगा: लॉकडाउन के कारण रोजगार खो चुकी महिलाओं के जीवकोपार्जन का साधन बना जीविका।
दरभंगा: कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने केलिए देशभर में लागू लॉकडाउन के कारण कई सेक्टरों में रोजगार प्रभावित हुआ। लोगो के समक्ष भुखमरी की स्थिति उतपन्न होने लगी।
ऐसे ही मामला सामने आया बहादुरपुर प्रखंड के ओझौल गांव की मशरूम की खेती और अगरबत्ती निर्माण करके जीवकोपार्जन करने वाली एक महिला समूह के सामने। मशरूम किसान के रूप में मशहूर हो चुकी ओझौल गांव की वन्दना झा ने जीविका से ट्रेनिंग लेकर कई महिलाओं को मशरूम की खेती और अगरबत्ती निर्माण का प्रशिक्षण देकर और कार्य करवा कर उन्हें स्वरोजगार उपलब्ध करवाया था। परंतु लॉकडाउन के कारण मशरूम का बीज और अगरबत्ती निर्माण की सामग्री मिलना भी बन्द हो गया था। साथ ही दुकानों के बन्द हो जाने के कारण उनकी पूँजी भी फंस गया था।
ऐसे में एक दिन वन्दना झा को जीविका से फोन आया। उन्हें मास्क निर्माण कार्य केलिए पूछा गया। वन्दना झा का भी सारा काम बन्द हो चुका था और घर की हालत भी ठीक नही थी। उन्होंने तुंरन्त हामी भर दी। फिर अपने साथ कार्य कर रही एक दो महिलाओं को भी लगाया। धीरे धीरे आर्डर बढ़ा तो उन्होंने सिलाई करने वाली महिलाओं को भी धीरे जोड़ा। आज के समय मे करीब 8-10 महिलाएं मिलकर इस कार्य को कर रही हैं। कुछ महिलाओं को सिलाई तो आता था, पर उनके पास सिलाई मशीन उपलब्ध नही था। ऐसे में जैसे तैसे वन्दना झा ने कुछ जगहों से मशीनों का भी इंतजाम किया और महिलाओं को उपलब्ध करवाया। आज वन्दना के साथ साथ रेणु देवी, पूनम देवी, तोष देवी आदि महिलाएं अपने घरों के कार्यो के साथ मास्क की सिलाई भी घर बैठे कर रही है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए वन्दना झा ने बताया कि जीविका ने शुरू से उन्हें खड़ा होने में मदद किया है। आज मुसीबत की घड़ी में पुनः एकबार जीविका उनके लिए वरदान साबित हुआ है। उन्होंने बताया कि कपड़ा और धागा जीविका की तरफ से उपलब्ध करवाया जाता है। महिलाएं मास्क तैयार करके देती हैं। महिलाओं को प्रति मास्क पांच रुपये मेहनताना के रूप मिलता है। सभी अपनी क्षमता और सुविधा के अनुसार सिलाई करती हैं। अभी तक दो हजार मास्क बना कर दे चुकी हैं। अभी लगभग दो हजार और मास्क का कपड़ा मिला हुआ है।
वंदना ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि बाजार में मास्क बाहर से मंगवाने के बजाय यदि इन्ही महिलाओं द्वारा निर्मित मास्क को बढ़ावा दिया जाय तो लॉकडाउन के कारण बेरोजगार हो चुकी ऐसी महिलाओ को जीवन यापन का साधन मिलेगा।
वहीं वंदना की टीम में काम कर रही एक महिला पूनम देवी ने बताया कि वे और उनके पति दोनो एकसाथ कैंटीन चलाते थे। लॉकडाउन के कारण दोनो व्यक्तियों का काम एकसाथ बन्द हो गया। इसकारण घर की परेशानी बढ़ गयी थी। ऐसे में यह काम मिलना वरदान से कम नही है।
पूनम देवी के पति मुन्नी लाल सहनी ने बताया कि उनका का बिजनेस लॉकडाउन के कारण ठप हो गया है। ऐसे में जीविका द्वारा मिले कार्य को उनकी पत्नी घर का काम करके बाकी समय मे करती है। ऐसे में कुछ आमदनी हो जाने से घर का ख़र्च चल रहा है। वे इस कार्य से बहुत खुश हैं। सबसे बड़ी बात, इस लॉक डाउन में उन्हें कहीं जाना भी नही पड़ता और हर बैठे रोजगार मिल गया है।
इस संबंध में दरभंगा के जिलाधिकारी डॉ0 त्यागराजन एसएम ने बताया कि जीविका की महिलाओं द्वारा बड़े पैमाने पर मास्क का निर्माण किया जा रहा है। सरकार के निर्देश के अनुसार हर पंचायत में मास्क का वितरण करवाना है। इसलिए इसे और बढ़ावा दिया जायेगा। मिथिला पेंटिंग के कलाकारों को भी हमने एक हजार मास्क का आर्डर दिया था। आगे भी इनके लिए कोशिश किया जाएगा।

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