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1 week ago

लाॅकडाउन में सोशल मीडिया पर मिथिलाक्षर की पाठशाला, देश-विदेश के लोग सीख रहे मातृलिपि।

दरभंगा: कोरोना महासंकट के कारण चल रहे देशव्यापी लाॅक डाउन में जहां देश-विदेश की विभिन्न गतिविधियां प्रभावित हुई है, वहीं सोशल मीडिया पर सजने वाली मिथिलाक्षर की पाठशाला में अपनी मातृलिपि सीखने वालों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। आलम यह है कि मधुबनी जिला के सौराठ गांव निवासी पंडित अजय नाथ झा शास्त्री द्वारा विलुप्त प्राय हो चुकी मिथिला की धरोहर लिपि मिथिलाक्षर को संरक्षित व संवर्धित करने के उद्देश्य से वर्ष 2013 में शुरू किए गए मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान को बीते सात वर्षों में जो अपेक्षित सफलता नहीं मिली, वह कोरोना महामारी के कारण बने लॉक डाउन पीरियड में मिल रही है।

जानकारी देते हुए मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान के स्थानीय वरिष्ठ संरक्षक प्रवीण कुमार झा ने बताया कि इस समय दुनिया के दर्जनभर देशों के करीब छ: हजार मैथिली भाषी लोग सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों से मिथिलाक्षर सीख रहे हैं। जिसमें सभी आयु, जाति व धर्म के लोग शामिल है।
उन्होंने बताया कि विदेशों में रहने वाले प्रवासी मैथिल के लिए लॉक पीरियड में कुल 53 समूह संचालित हो रहे हैं। जिसमें 90 दिनों का पाठ्यक्रम पूरा कर अद्यतन 2035 लोग मिथिलाक्षर में प्रवीण हो चुके हैं। इसमें हर उम्र, लिंग, जाति व संप्रदाय के लोग शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि अभियान के संस्थापक एवं नासिक से प्रकाशित ‘मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश’ पत्रिका के संपादक पं अजय नाथ झा शास्त्री के नेतृत्व में सोशल मीडिया पर सजने वाली मिथिलाक्षर की पाठशाला के समुचित क्रियान्वयन की बागडोर अभियान के संरक्षक समूह के विभिन्न लोगों ने बखूबी थाम रखी है। उनसे मिली जानकारी के अनुसार सऊदी अरब में अभियान की बागडोर शाहनवाज हुसैन ने थाम रखी है, जबकि यूनाइटेड स्टेट में अभियान की कमान स्वाति मिश्रा के हाथों है। इसी तरह, साउथ कोरिया में अरुण कुमार मेहता, ऑस्ट्रेलिया में खुशी शिशुरेंद्र झा संरक्षक की भूमिका बखूबी निभा रहे हैं।
दिल्ली में अभियान की कमान वरिष्ठ संरक्षक ब्रह्मानंद झा, राघव मिश्र, पंकज कुमार कर्ण, शंभूनाथ झा, आदि थामे हैं, जबकि मुंबई में अभियान के संचालन की बागडोर धर्मेंद्र कुमार झा, अनिल मिश्र व जगत रंजन झा, कटक में उग्रेश कुमार झा, जमशेदपुर में रूनू मिश्र, रांची में दीपक आनंद मलिक और बिहार में कृष्ण कांत झा, मंजू मिश्रा, आशीष कुमार झा, विवेक मिश्र, ललित ठाकुर, निभा देवी आदि मिथिला वासियों को मिथला की धरोहर लिपि सिखाने में लगे हैं।
उन्होंने बताया कि इस अभियान के माध्यम से अब तक करीब दो लाख लोग अपनी मातृ लिपि सीख चुके हैं, जिन्हें सात जगहों क्रमशः मधुबनी, मुम्बई, दिल्ली, दरभंगा, जमशेदपुर, सहरसा आदि जगहों पर सम्मान समारोह आयोजित कर प्रमाण पत्र प्रदान किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि अभियान का आठवां समारोह बीते 10 मई को पटना में प्रस्तावित था जिसे लाॅक डाउन की वजह से तत्काल स्थगित कर दिया गया है।

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