Home Featured एमके कॉलेज में कोरोना महामारी जीवन पद्धति विषयक वेबिनार का हुआ आयोजन।
3 weeks ago

एमके कॉलेज में कोरोना महामारी जीवन पद्धति विषयक वेबिनार का हुआ आयोजन।

दरभंगा: महारानी कल्याणी महाविद्यालय द्वारा शनिवार को कोरोना महामारी जीवन पद्धति विषयक वेबिनार का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत महारानी कल्याणी महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ• रमेश यादव के स्वागत भाषण से हुई।
विश्ववद्यालय के कुलसचिव कर्नल एन• के• रॉय इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे उन्होंने अतिथि संबोधन में कोविड-19 बीमारी से निजात पाने के लिए, दैनिक जीवन शैली को एक सकारात्मक रूप देकर उसे अपनी जीवन शैली में प्रयोगात्मक रूप देने पर जोर दिया।

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केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ राम नन्दन सिंह ने कोवीड -19 वैश्विक महामारी के उपरांत बदलते परिदृश्य और आगे की संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि आज भी गौतम बुद्ध के सिद्धांत एक नई और बेहतर विश्व व्यवस्था का मार्ग प्रशस्त करता है। बुद्ध के चार आर्य सत्य, मनुष्य के न केवल व्यवहारिक जीवन को बल्कि आंतरिक वातावरण को भी संपुष्ट करता है। बुद्ध के आत्मनिरीक्षण और जाग्रति का मार्ग मानसिक शांति और पवित्रता का प्रसार करता है जिससे मनुष्य हर एक विषम परिस्थिति को पार करने में सक्षम होता है।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ ज्योत्सना श्रीवास्तव ने बदलते पर्यावरण, स्वास्थ्य और रोग निवारक उपायों पर चर्चा करते हुए बताया कि आज इस महामारी की विषम परिस्थितियों में ‘आध्यात्मिकता’ ही वह एक मात्र संबल है जिसकी आज मनुष्य को मानसिक व्याधि से उबरने और जीवन को एक व्यवस्थित दिशा देने के लिए अपनाना आवश्यक हो गया है। उन्होंने बताया कि उपभोक्तावादी संस्कृति ने मनुष्य के अन्दर ”प्रभुता स्थापित करने का भाव” उत्पन्न किया है जिसके दुष्परिणाम का ही एक रूप है- कोवीड -19 वैश्विक महामारी। इसलिए किसी भी महामारी या समस्या का वास्तविक समाधान नैतिकता के धरातल पर ही संभव है।

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एआरएसडी काॅलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ० इन्द्रमोहन झा ने गांधी दर्शन के परिप्रेक्ष्य में कोवीड -19 वैश्विक महामारी की चर्चा करते हुए कहा कि यह महामारी मानव जनित है। उन्होंने कहा कि इस महामारी के दौरान मनुष्य के पाशविक और ईश्वरीय दोनों ही रूपों का दर्शन हुआ है। इसलिए इस महामारी की विषम परिस्थितियों में गांधी जी के अहिंसा, संयम, सत्य, समभाव आदि आदर्शों का अनुसरण करना और अपनी जीवन शैली को संतुलित करना आवश्यक हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि हमें प्रकृति के साथ चलकर उसकी सहायता से अपनी समस्याओं का समाधान करना चाहिए ताकि भविष्य में होने वाली इन आपदाओं से बचा जा सके।
इस वेबिनार में, लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ जय शंकर झा ने कहा कि कोरोना महामारी की संकट काल में पारिवारिक क्लेश, मानसिक अशांति, आत्महत्या आदि तरह के अवसाद मानव जीवन में तेजी से वृद्धि हुआ है इसलिए इस महामारी के समय में ध्यान योग के द्वारा हम इस महामारी को प्रसन्नता और अपने सकारात्मक विचारों के द्वारा मात दे सकते हैं। कोवीड -19 महामारी की समस्या के निदान की दिशा में उन्होंने योगेश्वर श्री कृष्ण का उदाहरण देते हुए कहा कि इस महामारी से युद्ध जीतने के लिए सर्वप्रथम मनुष्य को आत्मशुद्धि करना चाहिए तदुपरांत सर्वशुद्धि की ओर प्रस्थान करना चाहिए।
इस वेबिनार को सही दिशा में माॅडरेट करते हुए डॉ गीतांजलि चौधरी कोवीड -19 वैश्विक महामारी के समाधान की दिशा में कहा कि आज यह आवश्यक हो गया है कि हम अपनी सनातन- संस्कृति में निहित आदर्शों को व्यवहारिकता के धरातल पर जीवंत करें।इस वेबिनार की आयोजन सचिव डॉ प्रियंका राय ने सभी माननीय वक्ताओं को धन्यवाद दिया एवं उनकी सराहना की। इस वेबिनार के सफल संचालन में डॉ० विश्व दीपक त्रिपाठी और डॉ० दिवाकर नाथ झा ने विशेष रूप से अपना योगदान दिया।

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