
स्वाध्याय ही शिक्षक का मूल लक्षण : कुलपति।
दरभंगा: शिक्षक दिवस के अवसर पर संस्कृत विवि के दरबार हॉल में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ० शशिनाथ झा ने कहा कि स्वध्याय शिक्षक का मूल लक्षण होना चाहिए। इसी से छात्रों की उत्कंठा व जिज्ञासा को शांत किया जा सकता है। अन्यथा छात्र शिक्षक से दूर होते चला जाता है। सम्मानित हुए पूर्व कुलपति डॉ० देवनारायण झा ने कहा कि आप चाहें तो कोई पद पा सकते हैं लेकिन हर कोई शिक्षक नहीं हो सकता। डॉ० झा ने कहा कि छात्रों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों को खुद छात्रों से ज्यादा पढ़ने की जरूरत है।
पदाधिकारी संवर्ग से सम्मानित प्रोवीसी डॉ० सिद्धार्थ शंकर सिंह ने कहा कि प्रभु की विशेष कृपा से ही सही मायने में कोई शिक्षक बन पाता है।

शिक्षक कोटि से सम्मानित पूर्व कुलपति डॉ. उमेश शर्मा ने कहा कि जो शिक्षण करता है, शिक्षा देता है वही शिक्षक है।
शिक्षक पदाधिकारी के रूप में सम्मानित डीआर प्रथम डॉ० दीनानाथ साह ने शिक्षक को ब्रह्मा, विष्णु, महेश बताया।
कर्मचारी नेता डॉ० अनिल झा ने कहा कि विश्वविद्यालय के हित मे जो कार्य दिया जाएगा उसे वह सहर्ष पूर्ण करेंगे।
सेवानिवृत कर्मी शिवानन्द मिश्र ने भी हर सम्भव सहयोग का भरोसा दिलाया। पीआरओ निशिकांत ने बताया कि व्याकरण विभाग की प्रध्यापिका डॉ० साधना शर्मा के संचालन में सम्पन्न सम्मान समारोह को विधि पदाधिकारी डॉ० नवीन झा ने भी सम्बोधित किया।
वेद पाठ डॉ० सत्यवान कुमार व डॉ० दयानाथ झा ने, कुलगीत छात्रा मीना व वीणा ने प्रस्तुत किया। स्वागत भाषण डॉ० दिलीप कुमार झा व धन्यवाद ज्ञापन डीएसडब्ल्यू डॉ० सुरेश्वर झा ने किया।

