Home Featured सरकारी रिपोर्ट में 374 में 278 स्टेट बोरिंग कार्यशील, भौतिक सत्यापन में अधिकांश मिले बंद!

सरकारी रिपोर्ट में 374 में 278 स्टेट बोरिंग कार्यशील, भौतिक सत्यापन में अधिकांश मिले बंद!

दरभंगा: सरकारी फाइलों में किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए स्टेट बोरिंग चालू हैं, लेकिन जमीन पर तस्वीर इसके ठीक उलट है। वॉयस ऑफ दरभंगा की पड़ताल में भौतिक सत्यापन के दौरान अधिकांश स्टेट बोरिंग चालू हालत में नहीं मिला। दूसरी ओर, लघु जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट जिले के 374 स्टेट बोरिंग में 278 को कार्यशील बताती है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि अगर 278 बोरिंग कागज पर चालू हैं तो उनका पानी आखिर खेतों तक पहुंच क्यों नहीं रहा?

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विभाग की 6 अगस्त 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में कुल 374 स्टेट बोरिंग हैं। इनमें 278 कार्यशील और 96 गैर-कार्यशील दर्ज हैं। यानी विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार जिले के करीब तीन-चौथाई स्टेट बोरिंग किसानों को सिंचाई सुविधा देने की स्थिति में हैं।

लेकिन भौतिक सत्यापन में सामने आई स्थिति इन आंकड़ों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जमीन पर बोरिंग चालू नहीं मिला। कहीं बोरिंग बंद है तो कहीं मोटर अथवा तकनीकी व्यवस्था काम नहीं कर रही है। ऐसे में किसानों के सामने खेतों की सिंचाई की समस्या बनी हुई है। उन्हें अपनी फसल बचाने के लिए पानी के दूसरे साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

बेनीपुर-जाले में सबसे ज्यादा 14-14 बोरिंग बंद

विभागीय रिपोर्ट के अनुसार बेनीपुर में कुल 50 स्टेट बोरिंग हैं। इनमें 36 कार्यशील और 14 गैर-कार्यशील दर्ज हैं। जाले में 37 बोरिंग हैं, जिनमें 23 कार्यशील और 14 गैर-कार्यशील हैं। यानी दोनों प्रखंडों में 14-14 बोरिंग विभागीय रिकॉर्ड में ही बंद दर्ज हैं।

हायाघाट में 29 बोरिंग में 17 कार्यशील और 12 गैर-कार्यशील हैं। वहीं हनुमाननगर में 22 में 11 कार्यशील और 11 गैर-कार्यशील दर्ज किए गए हैं। यानी इन दोनों प्रखंडों में भी बड़ी संख्या में सरकारी बोरिंग विभाग के रिकॉर्ड में ही काम नहीं कर रहे हैं।

कहीं 30 तो कहीं 41 बोरिंग चालू, फिर खेतों तक पानी क्यों नहीं?

अलीनगर में 35 स्टेट बोरिंग में 30 कार्यशील और पांच गैर-कार्यशील दर्ज हैं। बहादुरपुर में 25 में 20 कार्यशील और पांच गैर-कार्यशील हैं। बहेड़ी में 22 में 16 कार्यशील और छह गैर-कार्यशील बताए गए हैं।

दरभंगा प्रखंड में 31 बोरिंग में 24 कार्यशील और सात गैर-कार्यशील हैं। वहीं सिंहवाड़ा में 47 में 41 बोरिंग कार्यशील और छह गैर-कार्यशील दर्ज हैं। कागज पर ये आंकड़े सिंचाई व्यवस्था की बेहतर तस्वीर दिखाते हैं, लेकिन भौतिक सत्यापन में एक भी बोरिंग चालू नहीं मिलने का दावा इस पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।

केवटी से तारडीह तक कागज पर बोरिंग चालू

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक केवटी में 24 बोरिंग में 21 कार्यशील और तीन गैर-कार्यशील हैं। मनीगाछी में 24 में 18 कार्यशील और छह गैर-कार्यशील दर्ज हैं। तारडीह में 10 में आठ कार्यशील और दो गैर-कार्यशील हैं।

बिरौल में पांच बोरिंग में दो कार्यशील और तीन गैर-कार्यशील बताए गए हैं। कुशेश्वरस्थान में पांच में तीन कार्यशील और दो गैर-कार्यशील हैं। सबसे उल्लेखनीय आंकड़ा घनश्यामपुर का है, जहां विभागीय रिकॉर्ड में सभी आठ बोरिंग कार्यशील दर्ज हैं।

96 बोरिंग खराब होने की बात विभाग ने मानी

विभागीय रिपोर्ट में जिले की 96 स्टेट बोरिंग को गैर-कार्यशील बताया गया है। विस्तृत सूची में कई बोरिंग के खराब होने के कारण के रूप में इलेक्ट्रिकल फॉल्ट, मैकेनिकल फॉल्ट और अन्य तकनीकी खराबी दर्ज की गई है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल उन 278 बोरिंग को लेकर है, जिन्हें विभाग ने कार्यशील बताया है। यदि ये बोरिंग वास्तव में चालू हैं तो इनसे कितने किसानों को सिंचाई की सुविधा मिल रही है? कितने एकड़ खेतों की सिंचाई हो रही है? और भौतिक सत्यापन में एक भी बोरिंग चालू क्यों नहीं मिली?

कागज और जमीन की हकीकत में बड़ा अंतर

सरकारी रिकॉर्ड में 278 बोरिंग कार्यशील हैं, जबकि खेतों में किसान सिंचाई के पानी के लिए परेशान हैं। यही अंतर पूरी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। कागज पर पानी चल रहा है, लेकिन खेतों में सूखा क्यों है?

बोरिंग चालू हैं तो किसानों के खेतों तक पानी क्यों नहीं पहुंच रहा?और अगर जमीन पर बोरिंग बंद हैं तो उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में कार्यशील किस आधार पर दर्ज किया गया? इन सवालों का जवाब सिर्फ फाइलों से नहीं, बल्कि बोरिंगवार भौतिक सत्यापन से ही मिल सकता है।

किसानों की प्यास बनाम सरकारी आंकड़े

किसानों के लिए स्टेट बोरिंग सिर्फ सरकारी आंकड़ा नहीं, बल्कि खेत की सिंचाई का साधन है। जब सरकारी रिकॉर्ड में 278 बोरिंग कार्यशील दिखाई जाती हैं और जमीन पर उनके चालू होने की स्थिति नहीं मिलती, तब रिकॉर्ड की वास्तविकता की जांच जरूरी हो जाती है।

374 बोरिंग का रिकॉर्ड, 278 चालू होने का दावा और जमीन पर अधिकांश चालू बोरिंग नहीं-इन तीनों तस्वीरों के बीच का सच अब जांच का विषय है।

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