Home Featured तालाब बचाओ अभियान की सफलता के सूत्रधार के रूप में उभरे हैं अजित कुमार मिश्रा।

तालाब बचाओ अभियान की सफलता के सूत्रधार के रूप में उभरे हैं अजित कुमार मिश्रा।

दरभंगा। अभिषेक कुमार

तालाब बचाओ अभियान को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता मिली है। इस सफलता में बहुत से लोगों का योगदान हो सकता है। पर इस संघर्ष में जो प्रमुख रूप से सूत्रधार के रूप में नाम उभर कर सामने आया है साथ, वो है समाजसेवी सह पर्यावरण प्रेमी अधिवक्ता अजित कुमार मिश्रा का नाम। इनके एवं इनके साथियों के संघर्ष के बदौलत सर्वोच्च अदालत ने दरभंगा के तीन सदियों पुराने ऐतिहासिक तालाबों दिग्घी, हराही और गंगासागर में सौंदर्यीकरण के नाम पर की जा रही मिट्टी भराई और निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगा दी है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने बिहार सरकार और बुडको (BUDCO) को आदेश दिया कि तालाबों में मिट्टी भराई और निर्माण का काम तुरंत रोका जाए। साथ ही सख्त टिप्पणी करते हुए पीठ ने राज्य सरकार को स्पष्ट लहजे में कहा—

“सौंदर्यीकरण के नाम पर जल निकायों (तालाबों) को भरा या नष्ट नहीं किया जा सकता। तालाबों से दूर रहें और अपने अधिकारियों को निर्देश दें कि वे जल स्रोतों से छेड़छाड़ न करें।”

अदालत ने आदेश दिया कि तीनों तालाबों का क्षेत्रफल पूरी तरह सुरक्षित रहे और मिट्टी भरकर इनका दायरा न घटाया जाए।

क्या था पूरा मामला?

* ₹100 करोड़ की योजना का विरोध: बिहार सरकार इन ऐतिहासिक तालाबों के कायाकल्प और सौंदर्यीकरण के लिए ₹100 करोड़ से अधिक की योजना चला रही थी।
* मिट्टी भराई का आरोप: योजना के तहत दुकानों/स्टॉलों और फुटपाथ के निर्माण के लिए लगभग 4 एकड़ क्षेत्र में मिट्टी व पत्थर डालने की बात सामने आई।
* तालाब बचाओ अभियान’ की पहल: संगठन संयोजक नारायणजी चौधरी एवं प्रमुख सक्रिय सदस्य अजित कुमार मिश्रा और स्थानीय पर्यावरणविदों ने इसे संरक्षित वेटलैंड्स और सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों का उल्लंघन बताते हुए याचिका दायर की।

इस फैसले से दरभंगा की ऐतिहासिक धरोहर और प्राकृतिक जल-संरचनाओं का अस्तित्व सुरक्षित होने की उम्मीद जगी है। साथ ही, यह फैसला पूरे देश में ‘सौंदर्यीकरण’ के नाम पर प्राकृतिक जल निकायों के विनाश को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर बन गया है।

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