
पेड़ के नीचे लगती है कक्षा, बरामदे में बनता है मध्यान भोजन; 2007 में स्थापित एनपीएस बहादुरपुर मुसहरी की बदहाल तस्वीर।
दरभंगा: शिक्षा के अधिकार और सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं के दावों के बीच बहादुरपुर प्रखंड के खैरा स्थित एनपीएस बहादुरपुर मुसहरी की तस्वीर सवाल खड़े करती है। अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में स्थित यह विद्यालय वर्ष 2007 में स्थापित हुआ था, लेकिन करीब दो दशक बाद भी विद्यालय के पास अपना भवन नहीं है। नतीजा यह है कि यहां पढ़ने वाले बच्चों को पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई करने की मजबूरी है। वर्तमान में विद्यालय हरिजन दरवाजे पर चलता है।
विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई होती है। यहां कुल 66 बच्चे नामांकित हैं, जिनमें 30 छात्र और 36 छात्राएं हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए तीन शिक्षक पदस्थापित हैं, जिनमें एक महिला और दो पुरुष शिक्षक हैं। शिक्षक और बच्चे मौजूद हैं, लेकिन पढ़ाई के लिए जरूरी विद्यालय भवन ही उपलब्ध नहीं है।
भवन नहीं, पेड़ के नीचे चलती है कक्षा
विद्यालय परिसर में बच्चों के लिए समुचित कक्षा-कक्ष नहीं होने के कारण वृक्ष के नीचे कक्षा संचालित होती है। गर्मी, बारिश और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में बच्चों की पढ़ाई किस तरह प्रभावित होती होगी, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। सवाल यह है कि शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बनाए गए इस विद्यालय के बच्चों को आज भी कक्षा-कक्ष जैसी बुनियादी सुविधा क्यों नहीं मिल सकी।
बरामदे में बनता है मध्यान भोजन
विद्यालय में मध्यान भोजन तैयार करने के लिए भी अलग व्यवस्था नहीं है। बरामदे में ही भोजन बनाया जाता है। वहीं शौचालय की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। शौचालय के नाम पर महज खानापूर्ति की स्थिति बताई जा रही है। विद्यालय परिसर में चापाकल तक नहीं है। बच्चों और विद्यालय कर्मियों को इधर-उधर से पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है।
प्रधानाध्यापक कक्ष में आंगनबाड़ी केंद्र
विद्यालय की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वार्ड संख्या नौ का आंगनबाड़ी केंद्र प्रधानाध्यापक कक्ष में संचालित हो रहा है। यानी जिस विद्यालय में बच्चों के लिए पर्याप्त भवन नहीं है, वहां उपलब्ध सीमित स्थान का इस्तेमाल दूसरे सरकारी केंद्र के संचालन के लिए भी किया जा रहा है।
सवाल: एसटी क्षेत्र के बच्चों के लिए कब बनेगा भवन?
यह मामला महज एक विद्यालय की आधारभूत सुविधा का नहीं, बल्कि अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा व्यवस्था का सवाल है। वर्ष 2007 में विद्यालय की स्थापना के बाद भी यदि बच्चों को भवन के बजाय पेड़ के नीचे पढ़ना पड़ रहा है, तो शिक्षा विभाग की योजनाओं और उनके क्रियान्वयन पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सरकार सरकारी विद्यालयों में आधारभूत संरचना विकसित करने और वंचित तबकों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर जोर देती है। ऐसे में सवाल है कि एसटी क्षेत्र में स्थित इस विद्यालय को अब तक अपना भवन क्यों नहीं मिला? क्या शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विद्यालय की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण किया है? यदि किया है तो भवन निर्माण और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर अब तक क्या कदम उठाए गए?
66 बच्चों के भविष्य से जुड़ा यह विद्यालय आज खुद अपने भविष्य की तलाश में है। जरूरत है कि शिक्षा विभाग इस विद्यालय की स्थिति का संज्ञान लेकर भवन निर्माण समेत पेयजल, शौचालय और मध्यान भोजन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करे।

