
दरभंगा में गजब का खेला! बिना चयन-मुक्त किए नई बहाली की तैयारी? मामला पहुंचा कोर्ट।
मामले में पंचायत स्तर से लेकर जिला और राज्य स्तर तक के अधिकारियों को बनाया गया प्रतिवादी
17 अगस्त को बीडीओ ने माना—बसंत कुमार हैं स्वच्छता पर्यवेक्षक, फिर भी अगले दिन नए चयन की प्रक्रिया शुरू!
दरभंगा: जिले के बहादुरपुर प्रखंड के बहादुरपुर देकुली ग्राम पंचायत में स्वच्छता पर्यवेक्षक के पद को लेकर सरकारी पत्राचार ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जिस पद पर बसंत कुमार के कार्यरत होने की जानकारी स्वयं प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के पास थी, उसी पद पर महज एक-दो दिन बाद नए स्वच्छता पर्यवेक्षक के चयन के लिए आमसभा बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
मामले को लेकर वर्तमान स्वच्छता पर्यवेक्षक बसंत कुमार ने न्यायालय की शरण ली है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को नियम विरुद्ध बताते हुए वाद संख्या 751/26 दायर किया है। न्यायालय ने वाद स्वीकार करते हुए मामले में नामजद सभी आठ प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
10 फरवरी 2022 को हुआ था चयन
जानकारी के अनुसार, बसंत कुमार का चयन 10 फरवरी 2022 को ग्राम सभा के माध्यम से बहादुरपुर देकुली पंचायत में स्वच्छता पर्यवेक्षक के रूप में किया गया था। इसके बाद 15 अगस्त 2022 से वह लगातार अपने पद पर कार्यरत हैं।
सरकार की द्वितीय मार्गदर्शिका के तहत 12 अप्रैल 2023 को आयोजित ग्राम सभा में भी उनके चयन को निरंतरता दिए जाने की बात कही गई है।
17 अगस्त को बीडीओ के पत्र में दर्ज है पद पर कार्यरत होने की बात
मामले का सबसे अहम पहलू 17 अगस्त 2026 का वह पत्र बताया जा रहा है, जिसे प्रखंड विकास पदाधिकारी ने जारी किया था।
पत्रांक 276, दिनांक 17.08.2026 के माध्यम से बसंत कुमार समेत पांच स्वच्छता पर्यवेक्षकों को चेतावनी देते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया था।

पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार चौधरी का तर्क है कि इस पत्र से स्पष्ट होता है कि 17 अगस्त को बीडीओ के संज्ञान में यह तथ्य था कि बसंत कुमार बहादुरपुर देकुली पंचायत में स्वच्छता पर्यवेक्षक के पद पर कार्यरत हैं।
फिर अगले दिन नए चयन की प्रक्रिया क्यों?
अधिवक्ता का कहना है कि जब 17 अगस्त को संबंधित पद पर बसंत कुमार के कार्यरत होने की जानकारी बीडीओ को थी, तो 18 अगस्त को प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी (बीपीआरओ) को नए स्वच्छता पर्यवेक्षक के चयन के लिए पत्र भेजने का आधार क्या था?

इसके बाद बीपीआरओ की ओर से 20 अगस्त को ग्राम पंचायत राज बहादुरपुर देकुली के मुखिया को पत्रांक 592 के संदर्भ में पत्र भेजकर 24 अगस्त को आमसभा आयोजित कर नए स्वच्छता पर्यवेक्षक के चयन का निर्देश दिया गया।

यहीं से पूरा मामला विवादित हो गया।
मुखिया ने भी उठाया था सवाल
20 अगस्त को जारी पत्र के जवाब में पंचायत के मुखिया ने 21 अगस्त को बीडीओ को पत्र भेजा। इसमें स्पष्ट किया गया कि बसंत कुमार पहले से ही नियमानुसार चयनित हैं और लगातार स्वच्छता पर्यवेक्षक के रूप में कार्य कर रहे हैं।

मुखिया ने अपने जवाब में यह भी कहा कि जब पद पर पहले से चयनित व्यक्ति कार्यरत है, तो नए स्वच्छता पर्यवेक्षक के चयन के लिए आमसभा आयोजित करना नियमानुकूल नहीं होगा।
बैक डेट में पत्र जारी करने का आरोप
मामले में एक और गंभीर आरोप पंचायत सचिव पर लगाया गया है।
आरोप है कि 24 अगस्त को आमसभा बुलाने के लिए पंचायत सचिव द्वारा 19 अगस्त 2026 की तारीख में पत्र जारी किया गया। यानी जिस समय नए स्वच्छता पर्यवेक्षक के चयन की प्रक्रिया से संबंधित आधिकारिक पत्राचार चल रहा था, उसी दौरान कथित तौर पर 19 अगस्त की तारीख वाला पत्र सामने आया।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पत्रों की तारीखों और क्रम को देखने पर पूरी प्रक्रिया संदिग्ध प्रतीत होती है और यह एक सुनियोजित तरीके से वर्तमान स्वच्छता पर्यवेक्षक को हटाकर नए व्यक्ति के चयन की कोशिश हो सकती है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
बिना चयन-मुक्त किए नई बहाली पर सवाल
बसंत कुमार के अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार चौधरी का कहना है कि स्वच्छता पर्यवेक्षक को पद से हटाने अथवा चयन-मुक्त करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। उनके अनुसार, बसंत कुमार के खिलाफ न तो किसी शिकायत के आधार पर चयन-मुक्ति की कार्रवाई की गई और न ही उन्हें पद से हटाने के लिए कोई शो-कॉज नोटिस दिया गया।
ऐसे में अधिवक्ता का सवाल है कि जब पुराने चयन को समाप्त करने की कोई विधिवत प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो उसी पद पर नए व्यक्ति के चयन के लिए आमसभा कैसे बुलाई जा सकती है?
अब न्यायालय में देना होगा जवाब
इन्हीं आरोपों और दस्तावेजों के आधार पर बसंत कुमार ने न्यायालय में वाद संख्या 751/26 दायर किया है।
न्यायालय ने वाद स्वीकार करते हुए मामले में सभी आठ प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। अब संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा।
ये बनाए गए हैं प्रतिवादी
मामले में पंचायत स्तर से लेकर जिला और राज्य स्तर तक के अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है—
1. पंचायत सचिव
2. मुखिया, ग्राम पंचायत राज बहादुरपुर देकुली
3. ब्लॉक कॉर्डिनेटर, लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान
4. प्रखंड विकास पदाधिकारी, बहादुरपुर
5. जिला कॉर्डिनेटर, लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान
6. उप विकास आयुक्त, दरभंगा
7. जिलाधिकारी, दरभंगा
8. प्रधान सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, बिहार सरकार
सवाल कई, जवाब का इंतजार
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 17 अगस्त को जिस पद पर बीडीओ के पत्र में बसंत कुमार के कार्यरत होने की बात सामने आती है, उसी पद पर 18 अगस्त से नए चयन की प्रक्रिया क्यों शुरू हुई?
दूसरा सवाल यह कि जब पंचायत के मुखिया ने 21 अगस्त को लिखित रूप से बता दिया कि पद पर पहले से व्यक्ति कार्यरत है और नई आमसभा नियमसम्मत नहीं है, तब भी प्रक्रिया क्यों जारी रही?
और तीसरा तथा सबसे गंभीर सवाल—19 अगस्त की तारीख में जारी बताए जा रहे पत्र की वास्तविकता और उसकी प्रक्रिया क्या है?
इन सवालों का जवाब अब विभागीय स्तर के साथ-साथ न्यायालय में भी सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल मामला न्यायालय के विचाराधीन है और संबंधित प्रतिवादियों का पक्ष सामने आना बाकी है।

