
दरभंगा में सवर्ण युवा वाहिनी का धरना, UGC इक्विटी रेगुलेशन वापस लेने और EWS में आयु सीमा छूट की मांग।
दरभंगा: UGC इक्विटी रेगुलेशन की वापसी, EWS वर्ग के अभ्यर्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु सीमा में छूट और आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा समेत विभिन्न मांगों को लेकर शनिवार को सवर्ण युवा वाहिनी के बैनर तले लहेरियासराय स्थित धरना स्थल पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। धरना में संगठन के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
धरना के दौरान वक्ताओं ने कहा कि प्रतियोगी

परीक्षाओं और उच्च शिक्षा से जुड़े अवसरों में समानता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए। संगठन ने सरकार से UGC इक्विटी रेगुलेशन को तत्काल वापस लेने, EWS वर्ग के अभ्यर्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु सीमा में छूट देने तथा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की।
सवर्ण युवा वाहिनी के संरक्षक डॉ. उद्भट मिश्रा ने कहा कि सरकार द्वारा UGC में लागू किए गए इक्विटी रेगुलेशन को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने इसे सवर्ण समाज के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था उनके अनुसार सवर्ण समाज के लिए अपमानजनक है।
उन्होंने आरक्षण व्यवस्था की भी समीक्षा की मांग की। डॉ. मिश्रा ने कहा कि लंबे समय से चली आ रही आरक्षण व्यवस्था से देश के विकास पर कितना प्रभाव पड़ा है, इसकी समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने आरक्षण व्यवस्था में सभी वर्गों को शामिल किए जाने की मांग रखी। साथ ही EWS वर्ग के अभ्यर्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु सीमा में छूट देने की मांग की।
वहीं, सवर्ण नेता बलराम कुंवर ने भी सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने UGC के नियम को सवर्ण समाज के लिए जटिल समस्या बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि EWS के लिए ऐसा स्पष्ट क्राइटेरिया निर्धारित किया जाना चाहिए, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को भी आवश्यक सुविधाओं और अवसरों का लाभ मिल सके।
बलराम कुंवर ने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि आर्थिक आधार पर समाज के सभी वर्गों के गरीब लोगों को समान अवसर और लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने अपने संबोधन में आरक्षण व्यवस्था को लेकर “भक्षण” शब्द का इस्तेमाल भी किया। उन्होंने कहा कि जाति और धर्म के आधार पर विभेद बढ़ने से सामाजिक विग्रह की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसके लिए उन्होंने समान नागरिक संहिता और आर्थिक आधार पर समानता के नियम लागू किए जाने की बात कही।
धरना के दौरान संगठन के जिलाध्यक्ष अभिजीत कश्यप ने सवर्ण समाज से जुड़े जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कई जनप्रतिनिधि सवर्ण समाज के समर्थन से चुनाव जीतकर सदन तक पहुंचे हैं, लेकिन समाज से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात नहीं रखते।
अभिजीत कश्यप ने कहा, “सबसे दुर्भाग्य और हंसी की बात यह है कि यहां के तमाम जनप्रतिनिधि, जो सवर्ण समाज का चोला ओढ़कर और टाइटल लगाकर रखते हैं, लेकिन सवर्णों के इस सर्वव्यापी आंदोलन पर आज तक उन्होंने अपना मुंह नहीं खोला है।”
उन्होंने जनप्रतिनिधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सवर्ण समाज अब अपने मुद्दों को लेकर एकजुट हो चुका है और जनप्रतिनिधियों को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि नेताओं को सवर्ण समाज के मुद्दों पर आवाज उठाने और जागरूकता फैलाने के लिए आगे आना चाहिए।
सवर्ण नेता हेमंत झा ने भी सवर्ण जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि मिथिलांचल में कई जनप्रतिनिधियों को सवर्ण मतदाताओं के समर्थन का लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि दरभंगा और मधुबनी में सवर्ण मतदाताओं की संख्या को देखते हुए राजनीतिक दल कई नेताओं को टिकट देते हैं और समाज के लोगों के समर्थन से वे चुनाव जीतकर सदन तक पहुंचते हैं।
हेमंत झा ने कहा, “लेकिन हमारे जो जनप्रतिनिधि जीतकर गए हैं, वे आज तक सवर्णों के लिए एक शब्द भी नहीं बोले हैं—चाहे तीन साल हो गया, पांच साल हो गया या दस साल हो गया। अगर आज तक सदन में सवर्णों के लिए एक भी बात रखते, तो पूरा मिथिलांचल गौरवान्वित महसूस करता।”
उन्होंने कहा कि संगठन ऐसे जनप्रतिनिधियों का विरोध करता है और भविष्य में ऐसे नेताओं को समर्थन नहीं देने की बात कही।
धरना के दौरान वक्ताओं ने सरकार से अपनी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। साथ ही कहा कि यदि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आंदोलन को आगे और व्यापक किया जाएगा।
धरना-प्रदर्शन में संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, युवा एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के अलावा राजन ठाकुर, अभिजीत कश्यप, उद्भट मिश्रा, हेमंत झा, प्रवीण झा, अमित सिंह, अंकित श्रीवास्तव, विक्की सिंह, गौरव ठाकुर, चंदन कुंवर, बलराम कुंवर सहित कई लोग मौजूद रहे।

