
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना में एक ही परिवार के दो सदस्यों को लाभ का आरोप, जांच की मांग।
दरभंगा: मुख्यमंत्री उद्यमी योजनाओं के तहत दरभंगा जिले के बसहा मिर्जापुर पते से जुड़े दो लाभार्थियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामले में पत्रकार सह सोशल एक्टिविस्ट निशांत कुमार झा ने बिहार सरकार की उद्योग मंत्री को आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

शिकायत में उपलब्ध सरकारी अभिलेखों का हवाला देते हुए बताया गया है कि जय चौधरी, पिता जटा शंकर चौधरी, निवासी बसहा मिर्जापुर, दरभंगा का चयन मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत हुआ था। रिकॉर्ड में उनका आवेदन संख्या CMYUVA20218579970411 दर्ज है और परियोजना के रूप में Paper Cups & Plate Manufacturing का उल्लेख है।

वहीं मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना की उपलब्ध चयन सूची में सुष्मिता नंदनी, निवासी बसहा मिर्जापुर का नाम दर्ज होने की बात कही गई है। शिकायत के अनुसार उनके आवेदन में पिता के नाम के रूप में JAY GOPAL CHOUDHARY और परियोजना के रूप में Oil Mill दर्ज है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि जय चौधरी और सुष्मिता नंदनी पति-पत्नी हैं और दोनों का पता भी एक ही है। इसी आधार पर सवाल उठाया गया है कि यदि दोनों के बीच पति-पत्नी का संबंध सरकारी दस्तावेजों से सत्यापित होता है, तो संबंधित वित्तीय वर्ष में लागू योजना के नियमों के तहत एक ही परिवार के दोनों सदस्यों को लाभ दिए जाने की पात्रता क्या थी।
आवेदन में सुष्मिता नंदनी के पिता के नाम को लेकर भी जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि आवेदन में दर्ज JAY GOPAL CHOUDHARY के नाम का वास्तविक दस्तावेजों से मिलान कराया जाए और यह पता लगाया जाए कि यह विवरण किस दस्तावेज के आधार पर दर्ज किया गया था।
शिकायत में दोनों लाभार्थियों के मूल आवेदन-पत्र, संलग्न दस्तावेज, परिवार संबंधी घोषणा, बैंक भुगतान और किस्तों से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही दोनों परियोजनाओं का भौतिक सत्यापन कर यह पता लगाने का अनुरोध किया गया है कि संबंधित इकाइयां वास्तव में स्थापित और संचालित हैं या नहीं।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यदि जांच में गलत जानकारी देने, नियमों के विपरीत लाभ लेने अथवा किसी अन्य प्रकार की अनियमितता की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए सरकारी राशि की वसूली की जाए।
शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि आवेदन किसी व्यक्ति को पूर्वाग्रहवश दोषी ठहराने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि सरकारी योजना में पारदर्शिता और नियमों के पालन की जांच के उद्देश्य से दिया गया है।
फिलहाल लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पूरे मामले में आवेदन में दर्ज विवरण, दोनों लाभार्थियों के बीच संबंध और योजना के नियमों के तहत उनकी पात्रता की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

