
अवैध वसूली बन गया है पुलिस का धंधा? अपराधी से ज्यादा पुलिस से लगता है डर, अपनी ही सरकार पर मंत्री मदन सहनी का बड़ा हमला।
दरभंगा: बहादुरपुर थाना क्षेत्र के खराजपुर में मोनू सहनी की मौत के बाद बिहार की पुलिस व्यवस्था को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अपनी ही सरकार में मंत्री मदन सहनी ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए अवैध वसूली और आम लोगों को डराने-धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

मंत्री मदन सहनी ने आरोप लगाया कि सादे लिबास में और बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों से पहुंचने वाले पुलिसकर्मी कार्रवाई के नाम पर लोगों को भयभीत करते हैं। उन्होंने दावा किया कि पुलिस के नाम पर लोगों से पैसे की मांग किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
मोनू सहनी की मौत के मामले का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि मोबाइल से जुड़े मामले में युवक और उसके परिवार पर दबाव बनाया गया था। उनके अनुसार, इसी पुलिसिया दबाव और भय के कारण मोनू ने आत्मघाती कदम उठाया।
मदन सहनी ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा, “अपराधी से ज्यादा पुलिस से डर लगता है।” मंत्री के इस बयान ने बिहार की कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पुलिस ही आम लोगों को डराने लगे और कार्रवाई के नाम पर दबाव बनाया जाने लगे, तो जनता आखिर शिकायत लेकर किसके पास जाएगी? मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ पुलिसकर्मियों की कार्यशैली से पुलिस और अपराधियों के बीच अंतर को लेकर लोगों के मन में सवाल पैदा हो रहे हैं।
मंत्री ने खराजपुर की घटना के बाद पुलिस फायरिंग को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका दावा है कि मौके पर हुई फायरिंग की जांच सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की।
सबसे अहम बात यह है कि ये आरोप किसी विपक्षी नेता की ओर से नहीं, बल्कि सरकार में शामिल मंत्री मदन सहनी की ओर से लगाए गए हैं। ऐसे में उनके बयान ने पुलिस की कार्यशैली और सरकार की जवाबदेही पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि, पुलिस की ओर से इन आरोपों का आधिकारिक पक्ष और स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है। इसलिए मंत्री द्वारा लगाए गए अवैध वसूली और पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या मोनू सहनी की मौत के मामले की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ मंत्री द्वारा लगाए गए पुलिस पर अवैध वसूली और प्रताड़ना के आरोपों की भी जांच होगी?

