
धोई घाट पर हुई बैठक में नदी के पुनर्जीवन पर मंथन, वक्ताओं ने कहा-कमला मिथिला की संस्कृति और जीवन का आधार।
दरभंगा: मृतप्राय होती जा रही और लगातार प्रदूषित हो रही कमला नदी के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए भारत और नेपाल के सामाजिक संगठनों ने साझा पहल शुरू की है। रविवार को भारत-नेपाल कमला मैत्री मंच के तत्वावधान में धोई घाट स्थित कमला नदी तट पर आयोजित बैठक में नदी को बचाने के लिए व्यापक जनआंदोलन चलाने का निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी योगेंद्र यादव ने की।

बैठक को संबोधित करते हुए कमला बचाओ अभियान से जुड़े बिक्रम यादव ने कहा कि मिथिला में कमला नदी का महत्व गंगा के समान है। यह केवल एक नदी नहीं, बल्कि मिथिला की संस्कृति, आस्था और जनजीवन का आधार रही है। उन्होंने कहा कि लगातार प्रदूषण और जल प्रवाह में कमी के कारण नदी का अस्तित्व संकट में है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां इस धरोहर से वंचित हो सकती हैं। उन्होंने भारत और नेपाल के लोगों से इस अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने की अपील की।
तालाब बचाओ अभियान के संयोजक नारायण जी चौधरी ने कहा कि नेपाल की महाभारत पर्वत श्रृंखला से निकलने वाली कमला नदी पूर्व में झंझारपुर से दरभंगा तक लगभग 45 किलोमीटर क्षेत्र में अपनी दस धाराओं में प्रवाहित होती थी। बाढ़ नियंत्रण के उद्देश्य से दोनों किनारों पर तटबंध बनने के बाद इसकी नौ धाराओं को बंद कर दिया गया। इसके परिणामस्वरूप एक ओर बाढ़ और दूसरी ओर सुखाड़, जलजमाव तथा जल प्रदूषण जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगीं।

वक्ताओं ने कहा कि कमला नदी की शाखाएं और उपशाखाएं सैकड़ों तालाबों, चौरों और जलाशयों को जल उपलब्ध कराती थीं, जिससे कृषि, पशुपालन और भू-जल संरक्षण को मजबूती मिलती थी। नदी के कमजोर होने से पूरे मिथिलांचल की पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

छात्र नेता दिलीप कुमार ने कहा कि कमला नदी से मिथिला के लोगों का भावनात्मक जुड़ाव है। इसके संरक्षण के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। बैठक में नदी के संरक्षण को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाने तथा भारत-नेपाल स्तर पर समन्वित प्रयास तेज करने पर भी सहमति बनी।

