
जन सुराज की पलटीमार पॉलिटिक्स से गरमाया दरभंगा स्नातक सीट का रण, रविंद्र यादव ने खोला बगावत का मोर्चा।
दरभंगा: बिहार विधान परिषद की दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सियासत में आखिरी वक्त पर आए बदलाव ने चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। जन सुराज की ओर से पहले रविंद्र कुमार यादव को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद अब टिकट बदलने और इम्तियाज नूरानी को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। पार्टी के इस फैसले के बाद रविंद्र कुमार यादव ने बगावती तेवर अपनाते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है।

गौरतलब है कि जन सुराज ने 20 सितंबर को बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए पांच प्रत्याशियों की घोषणा की थी। इसमें दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से रविंद्र कुमार यादव का नाम शामिल था।
इसके बाद बदले राजनीतिक घटनाक्रम में कांग्रेस नेता इम्तियाज नूरानी के जन सुराज में शामिल होने और उन्हें दरभंगा स्नातक सीट से प्रत्याशी बनाए जाने की बात सामने आई। इसी घटनाक्रम के बाद रविंद्र कुमार यादव ने पार्टी के फैसले के खिलाफ निर्दलीय मैदान में उतरने का निर्णय लिया है।
रविंद्र कुमार यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा, “मैं निर्दलीय चुनाव लड़ूंगा।” उन्होंने पोस्ट में कहा कि स्नातकों का साथ उनके साथ है और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने यह भी लिखा कि चुनाव केवल पैसे के दम पर नहीं जीते जाते, बल्कि स्नातकों की आवाज उठाने वाले, उनके बीच रहने वाले और उनकी समस्याओं के लिए संघर्ष करने वाले लोग भी चुनाव जीत सकते हैं।

रविंद्र कुमार ने आगे कहा कि इस बार स्नातक समाज अपनी ताकत दिखाएगा और अपनी आवाज को बुलंद करेगा। पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा—“स्नातकों का साथ — रवीन्द्र कुमार यादव के साथ।”
टिकट बदलाव से बदला सियासी समीकरण
जन सुराज के टिकट में बदलाव के बाद अब दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मुकाबले के समीकरण पर चर्चा तेज हो गई है। एक तरफ पार्टी का आधिकारिक प्रत्याशी होगा, तो दूसरी तरफ टिकट से वंचित किए गए रविंद्र कुमार यादव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने की तैयारी में हैं।

दरभंगा स्नातक सीट पर पहले से ही राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ी हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार जन सुराज ने रविंद्र यादव को प्रत्याशी घोषित किया था, जबकि आरजेडी ने अनिल कुमार झा को उम्मीदवार बनाया है।

ऐसे में जन सुराज के भीतर टिकट को लेकर हुए इस बदलाव और रविंद्र कुमार यादव के निर्दलीय चुनाव लड़ने के ऐलान ने मुकाबले को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि रविंद्र यादव अपने समर्थकों और स्नातक मतदाताओं के बीच किस तरह अभियान चलाते हैं और टिकट बदलाव के बाद चुनावी मैदान में क्या नया समीकरण बनता है।

