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न्यायिक सेवा में संस्कृत के उपयोग का प्रयास करेंगे : न्यायाधीश।

दरभंगा: कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में चल रहे संस्कृत सप्ताह समारोह के छठे दिन रविवार को दरबार हॉल में वृहद सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, भागलपुर प्रशांत कुमार झा ने संस्कृत और भारतीय संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला।

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उन्होंने कहा कि संस्कृत देवभाषा है। उनका प्रयास रहेगा कि न्यायिक सेवा में भी संस्कृत के उपयोग को बढ़ावा मिले। उन्होंने परिवार में भी संस्कृत को अपनाने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय में इस तरह के आयोजनों का विशेष महत्व है। यहां संस्कृत का अध्ययन केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवहार, कला, अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक चेतना से भी जुड़ता है। संस्कृत में संवाद, अभिनय और गीतों की प्रस्तुति से विद्यार्थियों में भाषा के प्रति आत्मविश्वास बढ़ता है और संस्कृत को जीवंत एवं जनसुलभ बनाने में मदद मिलती है।

विशिष्ट अतिथि जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी चंदन कुमार ने कहा कि कला और संस्कृति के क्षेत्र में दरभंगा का विशिष्ट स्थान रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रभारी कुलपति प्रो. दिलीप कुमार झा ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, संस्कार और परंपराओं से जोड़ना भी है।

जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. निशिकांत प्रसाद सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने गीत, नाटक, स्तोत्र-पाठ और अभिनय समेत विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और संस्कृत की समृद्ध परंपरा को जीवंत किया गया।

सारस्वत अतिथि एलएनएमयू के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत झा ने संस्कृत और संस्कृति की विस्तृत व्याख्या की। मौके पर बीबीयू केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के सहायक प्राध्यापक डॉ. विपिन कुमार झा, संयोजक डॉ. सुधीर कुमार, डॉ. रामसेवक झा समेत अन्य ने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राचार्या डॉ. साधना शर्मा और कमलेन्द्र चक्रपाणी ने किया।

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