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10 सितंबर को मुशहर महासम्मेलन, समाज की दशा-दिशा पर होगा मंथन।

दरभंगा: मुशहर समाज की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति को लेकर आगामी 10 सितंबर 2026 को मुशहर महासम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। लहेरियासराय स्थित प्रमंडलीय मुख्यालय के निकट प्रेक्षागृह में होने वाले इस महासम्मेलन में समाज की मौजूदा स्थिति, सरकारी योजनाओं का लाभ, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक चुनौतियों के साथ-साथ भविष्य की रणनीति पर मंथन किया जाएगा।

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कार्यक्रम के संयोजक मनोज सदा ने बताया कि महासम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि मुशहर समाज की वर्तमान दशा और आगे की दिशा तय करने का प्रयास है। सम्मेलन 10 सितंबर को दिन के 11 बजे आयोजित होगा। इसकी तैयारियों को लेकर सर्किट हाउस में बैठक भी की गई है। दरभंगा जिले के सभी 18 प्रखंडों और 309 पंचायतों से समाज के बुद्धिजीवी, मजदूर, किसान, नौजवान, छात्र, माताएं और बहनों को इसमें शामिल होने का आह्वान किया गया है।

40 लाख की आबादी, फिर भी विकास में पीछे

मनोज सदा ने मुशहर समाज की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि बिहार में मुशहर समाज की आबादी लगभग 40 लाख है। इतनी बड़ी आबादी के बावजूद समाज का बड़ा हिस्सा आज भी शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है।

उन्होंने शिक्षा की कमी और नशे जैसी सामाजिक समस्याओं को समाज के सामने बड़ी चुनौती बताया। उनका कहना है कि यदि बच्चों को बेहतर शिक्षा, उचित मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के अवसर मिलें, तो आने वाली पीढ़ी समाज की तस्वीर बदल सकती है।

बच्चों को मजदूरी में लगाने का मुद्दा भी उठेगा

मनोज सदा ने मखाना प्रोसेसिंग सहित विभिन्न कार्यों में मुशहर समाज के बच्चों के कथित रूप से लगाए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में बच्चों को ठेकेदारों के माध्यम से दूसरे स्थानों पर ले जाकर लंबे समय तक काम कराया जाता है।

उन्होंने इसे बच्चों के भविष्य और शिक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल बताते हुए प्रभावी हस्तक्षेप की जरूरत बताई है।

योजनाएं हैं, लेकिन लाभ अंतिम व्यक्ति तक क्यों नहीं?

महासम्मेलन में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और उनके वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठने की संभावना है।

मनोज सदा ने कहा कि सरकार की ओर से रोजगार, स्वरोजगार और कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए योजनाएं संचालित हैं, लेकिन जागरूकता और उचित मार्गदर्शन के अभाव में समाज के अंतिम व्यक्ति तक इनका लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।

उन्होंने MSME और लघु जल संसाधन विभाग की योजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि समाज के लोगों को योजनाओं की जानकारी और उसका लाभ लेने की प्रक्रिया समझाई जाए, तो बड़ी संख्या में परिवार रोजगार और कृषि गतिविधियों से जुड़ सकते हैं।

श्याम सुंदर सदा ने उठाया आरक्षण में वर्गीकरण का सवाल

महासम्मेलन की तैयारियों के बीच जदयू अनुसूचित जाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष श्याम सुंदर सदा ने भी मुशहर समाज की स्थिति और उसके उत्थान को लेकर महत्वपूर्ण बातें कही हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा दलित और महादलित वर्गीकरण किए जाने से समाज के वंचित तबकों को लाभ मिला और टोला सेवक तथा विकास मित्र जैसे पदों पर उनके समाज के लोगों को अवसर प्राप्त हुआ।

हालांकि, उन्होंने कहा कि बिहार में सामाजिक और आर्थिक रूप से सबसे निचले पायदान पर रहने वाले समुदायों में मुशहर समाज प्रमुख है। सरकारों की ओर से लगातार उत्थान की बातें होती रही हैं, लेकिन समाज का बड़ा हिस्सा अभी भी विकास की मुख्यधारा से पीछे है।

श्याम सुंदर सदा ने सरकार से आरक्षण में वर्गीकरण यानी ‘कोटे के अंदर कोटा’ लागू करने की मांग की। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप आरक्षण के लाभ का प्रभावी और समान वितरण होना चाहिए, ताकि सबसे अधिक वंचित समुदायों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।

राजनीतिक नेतृत्व को भी आत्ममंथन की जरूरत

मनोज सदा ने समाज के राजनीतिक नेतृत्व पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अलग-अलग सरकारों में मुशहर समाज से जुड़े लोगों को राजनीतिक पद और जिम्मेदारियां मिलती रही हैं, लेकिन उसका व्यापक लाभ आम परिवारों तक नहीं पहुंच सका।

उन्होंने कहा कि समाज का नेतृत्व व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों से ऊपर उठकर शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सम्मान और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए काम करे।

महासम्मेलन में बनेगी आगे की रणनीति

महासम्मेलन का उद्देश्य मुशहर समाज में जागरूकता, एकता और अधिकारों के प्रति समझ पैदा करना बताया गया है। सम्मेलन में इस बात पर मंथन होगा कि सरकारी योजनाओं और संवैधानिक अधिकारों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है और इसके लिए आगे क्या रणनीति अपनाई जाए।

मुशहर समाज से जुड़े नेताओं और आयोजकों के बयानों से साफ है कि इस महासम्मेलन में केवल समस्याओं की चर्चा नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं की पहुंच, बच्चों के भविष्य और आरक्षण में हिस्सेदारी जैसे मुद्दों को लेकर सामूहिक दिशा तय करने की कोशिश होगी।

मनोज सदा ने समाज के लोगों से बड़ी संख्या में महासम्मेलन में पहुंचने की अपील करते हुए कहा कि अब समय केवल समस्याओं पर चर्चा करने का नहीं, बल्कि उनके समाधान के लिए सामूहिक रणनीति बनाने का है।

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