
बच्चों में ध्यान अभाव एवं अतिसक्रियता विकार के इलाज में नई उम्मीद, दरभंगा के डॉ. उद्भट मिश्रा का शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित।
दरभंगा: शहर के जाने माने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. उद्भट मिश्रा का बच्चों में ध्यान अभाव एवं अतिसक्रियता विकार (ADHD) के उपचार से संबंधित शोध अमेरिका से प्रकाशित होने वाले Open Journal of पेडिअतरिक्स में प्रकाशित हुआ है। शोध में आयुर्वेदिक औषधि ब्राह्मी (Bacopa monnieri) और एलोपैथिक दवा पिरासिटाम (Piracetam) के संयुक्त उपयोग का अध्ययन किया गया है।

छह महीने के इस पायलट अध्ययन में बच्चों के ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और अतिसक्रिय व्यवहार में सुधार का आकलन किया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, अध्ययन के दौरान इस संयोजन के उपयोग से उल्लेखनीय सुधार देखा गया और कोई गंभीर दुष्प्रभाव सामने नहीं आया। हालांकि, अध्ययन के निष्कर्षों को अंतिम चिकित्सकीय प्रमाण मानने के बजाय प्रारंभिक परिणाम के रूप में देखा जाना चाहिए।
शोध के नैदानिक डेटा के प्रबंधन, रखरखाव और विश्लेषण में रेडिएंट ग्रुप के निदेशक प्रशांत कुमार झा ‘बबलू’ तथा डॉ. मिश्रा की पत्नी एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सोनम मिश्रा ने तकनीकी सहयोग दिया।
डॉ. उद्भट मिश्रा को एकीकृत चिकित्सा दृष्टिकोण की प्रेरणा अपने पिता डॉ. मोहन मिश्रा के शोध कार्यों से मिली। डॉ. मोहन मिश्रा को कालाजार पर उनके शोध कार्य के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। डॉ. उद्भट मिश्रा पूर्व में अपने पिता की शोध टीम से भी जुड़े रहे हैं, जहां बुजुर्गों में डिमेंशिया के उपचार में ब्राह्मी के चिकित्सीय उपयोग पर काम किया गया था। इसी अनुभव को आधार बनाकर बच्चों में इसके संभावित उपयोग का अध्ययन किया गया।
हालांकि शोध में उत्साहजनक परिणाम सामने आने की बात कही गई है, लेकिन इसके साथ इसकी सीमाओं को भी स्पष्ट किया गया है। अध्ययन में केवल बालकों को शामिल किया गया था और लिवर तथा किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों की विस्तृत प्रयोगशाला जांच नहीं की गई थी। ऐसे में उपचार की प्रभावशीलता और दीर्घकालिक जैव-रासायनिक सुरक्षा को स्थापित करने के लिए बड़े नमूने और विभिन्न केंद्रों पर किए जाने वाले रैंडमाइज्ड कंट्रोल ट्रायल (RCT) की आवश्यकता बताई गई है।
विशेषज्ञों के स्तर पर इस तरह के प्रारंभिक अध्ययन को आगे के व्यापक नैदानिक परीक्षणों के लिए आधार के रूप में देखा जाता है। इसलिए इस शोध के निष्कर्षों के आधार पर ADHD के उपचार को लेकर व्यापक चिकित्सकीय निष्कर्ष निकालने से पहले बड़े और नियंत्रित अध्ययनों के परिणामों की प्रतीक्षा आवश्यक होगी।

