
पैगम्बरपुर पुल निर्माण में किसकी ‘चूक’? बिजली पोल बना रोड़ा, 3.20 लाख के भुगतान पर थमा काम।
पुल निर्माण में देरी पर संवेदक और विभागों ने एक-दूसरे के पाले में डाली गेंद
दरभंगा: सिंहवाड़ा प्रखंड क्षेत्र के पैगम्बरपुर में निर्माणाधीन पुल के काम में हो रही देरी को लेकर अब संवेदक और संबंधित विभाग आमने-सामने नजर आ रहे हैं। पुल निर्माण के रास्ते में आ रहे बिजली पोल और 11 केवी लाइन को हटाने का काम नहीं होने से निर्माण कार्य प्रभावित है। वहीं, इस देरी को लेकर संवेदक और विभागों की ओर से जिम्मेदारी एक-दूसरे के पाले में डाली जा रही है।

मामला NABARD योजना के तहत सिंहवाड़ा प्रखंड के T02 से पैगम्बरपुर पथ पर निर्माणाधीन HL RCC Bridge का है। पुल के एलाइनमेंट में 11 केवी बिजली लाइन के पोल और तार आने के कारण निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही है। बिजली विभाग का कहना है कि पोल और लाइन शिफ्टिंग के लिए निर्धारित राशि जमा होने के बाद ही स्थानांतरण का कार्य कराया जाएगा।
बिजली विभाग ने दिया 3.20 लाख का प्राक्कलन
विद्युत आपूर्ति प्रमंडल, दरभंगा ग्रामीण के विद्युत कार्यपालक अभियंता ने 18 जुलाई 2026 को पत्र संख्या 1266 के माध्यम से ग्रामीण कार्य विभाग को बताया कि पुल निर्माण के एलाइनमेंट में आने वाली 11 केवी एवं एलटी लाइन के स्थानांतरण और डिस्मेंटलिंग के लिए 3,20,688 रुपये का प्राक्कलन तैयार किया गया है।

विभाग के अनुसार स्वीकृत प्राक्कलन की राशि जमा होने के बाद ही पोल और लाइन की शिफ्टिंग की कार्रवाई की जाएगी। पत्र में यह भी कहा गया है कि स्वीकृत प्राक्कलन की तिथि से तीन माह के अंदर निर्धारित राशि जमा नहीं होने पर आवेदन रद्द माना जा सकता है।
43,770 रुपये पहले जमा, फिर भी पूरी राशि बाकी
बिजली विभाग के पत्र में बताया गया है कि कार्य की अनिवार्यता को देखते हुए संबंधित संवेदक द्वारा 43,770 रुपये पर्यवेक्षण शुल्क के रूप में पहले ही जमा किए जा चुके हैं। यह राशि स्वीकृत प्राक्कलन में शामिल है।
इसके बावजूद बिजली पोल और लाइन शिफ्टिंग के लिए निर्धारित पूरी राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका है। बिजली विभाग ने संबंधित राशि उपलब्ध कराने के बाद शिफ्टिंग कार्य कराने की बात कही है।
ग्रामीण कार्य विभाग ने NABARD से मांगी राशि
बिजली विभाग से पत्र मिलने के बाद ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल दरभंगा-2 के कार्यपालक अभियंता ने 20 जुलाई 2026 को NABARD के नोडल पदाधिकारी को पत्र भेजा। इसमें पुल के एलाइनमेंट में मौजूद 11 केवी बिजली तार एवं पोल को विस्थापित करने के लिए बिजली विभाग द्वारा दिए गए 3,20,688 रुपये के प्राक्कलन के अनुरूप राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।

ग्रामीण कार्य विभाग के पत्र में बिजली विभाग के पत्र का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि राशि उपलब्ध होने के बाद आगे की कार्रवाई की जा सकेगी।
सवाल यह कि आखिर देरी की जिम्मेदारी किसकी?
पुल निर्माण की देरी को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बिजली पोल शिफ्टिंग पुल निर्माण के लिए जरूरी थी तो इसकी राशि की व्यवस्था समय रहते क्यों नहीं हो सकी?
एक ओर संवेदक की ओर से बिजली पोल और लाइन के कारण काम प्रभावित होने की बात सामने आती है, तो दूसरी ओर बिजली विभाग का कहना है कि बिना प्राक्कलन राशि जमा हुए शिफ्टिंग संभव नहीं है। वहीं, ग्रामीण कार्य विभाग ने अब राशि की व्यवस्था के लिए NABARD को पत्र भेज दिया है।
इस तरह पुल निर्माण में देरी की जिम्मेदारी फिलहाल संवेदक से लेकर बिजली विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग तक एक-दूसरे के पाले में जाती दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों की बढ़ी चिंता
पैगम्बरपुर और आसपास के ग्रामीणों को इस पुल से आवागमन की सुविधा मिलने की उम्मीद है। लेकिन निर्माण कार्य में लगातार बाधा से लोगों की परेशानी बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिजली पोल शिफ्टिंग ही काम में बाधा है तो संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाकर राशि और शिफ्टिंग की प्रक्रिया जल्द पूरी की जानी चाहिए, ताकि पुल निर्माण में और विलंब न हो।
फिलहाल गेंद NABARD से राशि उपलब्ध कराने के पाले में है। राशि मिलने के बाद बिजली विभाग को भुगतान होगा, फिर पोल और 11 केवी लाइन की शिफ्टिंग होगी और उसके बाद ही पुल निर्माण कार्य पूरी गति से आगे बढ़ने की उम्मीद है। सवाल सिर्फ इतना है कि इस पूरी प्रक्रिया में और कितना वक्त लगेगा और पैगम्बरपुर के लोगों को पुल की सुविधा के लिए अभी कितना और इंतजार करना पड़ेगा।

