
इलाज को तरसे मरीज, मांगों पर अड़े रहे जूनियर डॉक्टर; डीएम की पहल पर खत्म हुई हड़ताल।
दरभंगा: डीएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों की 44 घंटे से जारी हड़ताल शुक्रवार रात करीब नौ बजे समाप्त हो गई। जिलाधिकारी कौशल कुमार के हस्तक्षेप और जेडीए के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता के बाद जूनियर डॉक्टर काम पर लौट आए। हड़ताल के दौरान अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित रही। ओपीडी, इमरजेंसी, जांच और ऑपरेशन सेवाएं प्रभावित होने से दूर-दराज से पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

हड़ताल के दौरान अस्पताल के विभिन्न वार्डों में 11 मरीजों की मौत की बात सामने आई है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने इलाज में किसी तरह की कोताही से इनकार किया है। प्रशासन के अनुसार, जिन मरीजों की मौत हुई, उनकी स्थिति पहले से ही बेहद गंभीर थी।
तीन हजार से अधिक मरीज बिना इलाज लौटे
शुक्रवार को भी ओपीडी और इमरजेंसी में चिकित्सा सेवा प्रभावित रही। बड़ी संख्या में मरीज इलाज की उम्मीद में डीएमसीएच पहुंचे, लेकिन उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। बताया गया कि तीन हजार से अधिक मरीजों को इलाज नहीं मिल सका। कई गंभीर मरीजों को परिजन निजी अस्पतालों में ले जाने को मजबूर हुए।
अस्पताल के इनडोर में भर्ती मरीजों के बीच भी हड़कंप की स्थिति रही। चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित होने के कारण कई मरीजों के परिजनों ने उन्हें दूसरे अस्पतालों में ले जाना शुरू कर दिया।
निबंधन शुरू हुआ, फिर बंद कराया
शुक्रवार को अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्रा और उपाधीक्षक डॉ. अमित कुमार झा सर्जरी भवन पहुंचे और ओपीडी में मरीजों का निबंधन शुरू कराया। करीब दो सौ मरीजों का निबंधन किया जा चुका था। इसी दौरान जूनियर डॉक्टर वहां पहुंच गए और निबंधन बंद करा दिया। निबंधित मरीजों का इलाज भी शुरू नहीं हो सका।
पांच रुपये का निबंधन शुल्क देकर इलाज की आस में बैठे मरीजों को भी अस्पताल से बैरंग लौटना पड़ा।
ऑपरेशन थिएटर में लटका रहा ताला
हड़ताल के कारण अस्पताल के सभी ऑपरेशन थिएटरों में ताले लटके रहे। विभिन्न प्रकार की जांच सेवाएं भी प्रभावित रहीं। सर्जरी भवन में पूरे दिन अफरातफरी का माहौल बना रहा। इमरजेंसी में इलाज की सुविधा प्रभावित होने के कारण गंभीर मरीजों के परिजनों को उन्हें लेकर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा।
सुरक्षा समेत कई मांगों को लेकर अड़े थे जूनियर डॉक्टर
डीएमसीएच जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने डॉक्टरों की सुरक्षा समेत कई मांगों को लेकर हड़ताल की थी। जेडीए का कहना था कि फ्रंटलाइन पर काम करने वाले जूनियर डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन ठोस व्यवस्था नहीं की गई।
जेडीए ने अस्पताल में डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए पुलिस की अलग विंग गठित करने, एक मरीज के साथ अधिकतम दो परिजनों को प्रवेश देने, अस्पताल की व्यवस्था में सुधार, हॉस्टल की मरम्मत और जलजमाव की समस्या दूर करने समेत कई मांगें रखी थीं।
इमरजेंसी गेट पर मरीज के परिजनों और जूनियर डॉक्टरों में नोकझोंक
शुक्रवार को डीएमसीएच इमरजेंसी के मुख्य प्रवेश गेट के सामने जूनियर डॉक्टरों और मधुबनी से आए मरीज के परिजनों के बीच नोकझोंक हो गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मारपीट का आरोप लगाया।
जूनियर डॉक्टरों का आरोप है कि इमरजेंसी बंद होने के बारे में पूछने पहुंचे कुछ लोगों ने बदसलूकी की और विरोध करने पर मारपीट की। जेडीए के अनुसार, घटना में एक जूनियर डॉक्टर की दाहिनी कलाई की हड्डी टूट गई, जिसके बाद उसका प्लास्टर कराया गया।
वहीं, मरीज के परिजनों ने आरोप लगाया कि जूनियर डॉक्टरों ने उनके साथ मारपीट की और एक व्यक्ति की शर्ट फाड़ दी। परिजनों का कहना था कि वे महिला मरीज का इलाज कराने पहुंचे थे। ओपीडी बंद होने की जानकारी मिलने पर उन्हें इमरजेंसी जाने को कहा गया था। वहां पहुंचने पर विवाद हुआ। परिजनों के अनुसार, एक व्यक्ति मोबाइल से घटना का वीडियो बनाने लगा, जिसके बाद उसके साथ मारपीट की गई। मामले में सीसीटीवी फुटेज से घटनाक्रम स्पष्ट होने की बात कही गई।
डीएम से वार्ता के बाद बनी सहमति
जूनियर डॉक्टरों और प्रशासन के बीच शुक्रवार दोपहर से ही वार्ता चल रही थी। डीएम की ओर से अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्रा और उपाधीक्षक डॉ. अमित कुमार झा को वार्ता के लिए भेजा गया था। हालांकि, जेडीए प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी की मौजूदगी में वार्ता की मांग कर रहा था।
सूचना मिलने पर जिलाधिकारी कौशल कुमार रात करीब 8.30 बजे डीएमसीएच के सर्जरी भवन पहुंचे। वहां जेडीए के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता हुई। जूनियर डॉक्टरों ने अपनी मांगें जिलाधिकारी के समक्ष रखीं। डीएम ने मांगों को लिखित रूप में देने को कहा। मांगों का लिखित ज्ञापन मिलने के बाद जिलाधिकारी ने नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया।
इसके बाद जेडीए ने हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने की घोषणा की। उपाधीक्षक डॉ. अमित कुमार झा ने भी जूनियर डॉक्टरों के काम पर लौटने की पुष्टि की। हड़ताल समाप्त होने के बाद इलाज की उम्मीद में बैठे मरीजों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली।

