Home Featured दरभंगा में RO पर रिश्वत मांगने का आरोप, 25 हजार रुपये नहीं देने पर म्यूटेशन आवेदन रद्द करने की धमकी।

दरभंगा में RO पर रिश्वत मांगने का आरोप, 25 हजार रुपये नहीं देने पर म्यूटेशन आवेदन रद्द करने की धमकी।

दरभंगा: बहादुरपुर प्रखंड के राजस्व कार्यालय से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। एक युवक ने बहादुरपुर के राजस्व अधिकारी पर दाखिल-खारिज के बदले 25 हजार रुपये रिश्वत मांगने तथा पैसे नहीं देने पर आवेदन खारिज करने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने इस संबंध में जिलाधिकारी को आवेदन देकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

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जानकारी के अनुसार, पतोर थाना क्षेत्र के मधुबन निवासी मिश्री पासवान के पुत्र शंकर पासवान ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी के नाम से एक जमीन खरीदी थी। उक्त जमीन के दाखिल-खारिज के लिए उन्होंने 14 जुलाई 2026 को ऑनलाइन आवेदन किया था, जिसका केस संख्या 1786 है।

शंकर पासवान के अनुसार, आवेदन के बाद आनंदित देवी की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई थी। इसके बाद दोनों पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया गया। उनका कहना है कि उनके पास जमीन से संबंधित सभी आवश्यक और वैध दस्तावेज उपलब्ध हैं तथा संबंधित भूमि पर उनका ही कब्जा है।

पीड़ित का आरोप है कि थाना परिसर में आयोजित सुनवाई के दौरान राजस्व अधिकारी ने उन्हें अलग ले जाकर दाखिल-खारिज स्वीकृत करने के बदले 25 हजार रुपये की मांग की। शंकर पासवान का कहना है कि उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए रिश्वत देने से इनकार कर दिया। आरोप है कि इसके बाद अधिकारी ने कहा कि यदि पैसे नहीं दोगे तो आवेदन खारिज कर दिया जाएगा और जहां जाना है, वहां जाकर लड़ते रहना।

पीड़ित ने बताया कि रिश्वत देने से इनकार करने के बाद उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर पूरे मामले की लिखित शिकायत की और निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।

इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। दाखिल-खारिज जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में रिश्वत मांगने के आरोप ने आम लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी है।

हालांकि, इस मामले में राजस्व अधिकारी का पक्ष सामने नहीं आया है। यदि उनका पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। वहीं, प्रशासन की ओर से शिकायत की जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।

नोट: यह समाचार आरोपों को आरोप के रूप में प्रस्तुत करता है और संबंधित अधिकारी का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे शामिल करने की बात भी स्पष्ट करता है।

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