
उपभोक्ता धोखाधड़ी पर सख्त जिला उपभोक्ता आयोग, आदेश की अवहेलना पर हो सकती है 2 साल तक की जेल।
दरभंगा: सामान खरीदने या किसी सेवा का लाभ लेने के बाद यदि उपभोक्ता के साथ धोखाधड़ी, कमी या सेवा में त्रुटि होती है, तो अब उसे न्याय के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी रास्ता उपलब्ध है। खास बात यह है कि अब शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी काफी हद तक ऑनलाइन हो गई है।
वॉयस ऑफ दरभंगा से बातचीत में जिला उपभोक्ता आयोग के प्रभारी अध्यक्ष पीयूष कमल दीक्षित ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों, ऑनलाइन शिकायत की प्रक्रिया, जरूरी साक्ष्यों और आयोग के आदेश का पालन नहीं करने पर होने वाली कानूनी कार्रवाई की जानकारी दी।
ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल सेवाएं भी कानून के दायरे में
प्रभारी अध्यक्ष ने बताया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के बाद ऑनलाइन खरीदारी, ई-कॉमर्स और डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं से जुड़े मामलों को भी उपभोक्ता आयोग के समक्ष उठाया जा सकता है। यानी ऑनलाइन सामान मंगाने से लेकर डिजिटल सेवा लेने तक उपभोक्ता के अधिकारों की कानूनी सुरक्षा का प्रावधान है।
आयोग में अध्यक्ष के साथ दो सदस्य
जिला उपभोक्ता आयोग की कार्यप्रणाली की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि आयोग में अध्यक्ष के साथ दो सदस्य होते हैं। इनमें एक महिला और एक पुरुष सदस्य होते हैं। किसी मामले की सुनवाई के लिए निर्धारित कोरम का पूरा होना आवश्यक है।
ई-जागृति पोर्टल से घर बैठे शिकायत
उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए ई-जागृति पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन परिवाद दाखिल करने की सुविधा उपलब्ध है। उपभोक्ता स्वयं अथवा अधिवक्ता के माध्यम से शिकायत दर्ज कर दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड कर सकता है।
प्रभारी अध्यक्ष के अनुसार, शिकायत या ‘कॉज ऑफ एक्शन’ उत्पन्न होने के दो वर्ष के भीतर परिवाद दाखिल किया जाना चाहिए। पोर्टल पर शिकायत दाखिल होने के बाद उसके एडमिशन पर निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्णय लिया जाता है।
विपक्षी पक्ष को नोटिस मिलने के बाद अपना लिखित पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है। निर्धारित समय सीमा के बाद जवाब दाखिल करने के अधिकार पर कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।
सामान लेते समय सबूत सुरक्षित रखना जरूरी
उपभोक्ता विवादों में साक्ष्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए खरीदारी के समय उपभोक्ताओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
सामान का पैकेट खोलते समय संभव हो तो वीडियो या फोटो बनाएं। इसके अलावा बिल, भुगतान की रसीद, ऑर्डर डिटेल, ई-मेल, मोबाइल मैसेज, ग्राहक सेवा से हुई बातचीत और शिकायत की रसीद को सुरक्षित रखें। किसी विवाद की स्थिति में यही दस्तावेज उपभोक्ता के पक्ष को प्रमाणित करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
आयोग के आदेश की अवहेलना पड़ी सकती है भारी
जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश का पालन नहीं करने की स्थिति में उपभोक्ता को कानूनी उपाय उपलब्ध हैं। प्रभारी अध्यक्ष ने बताया कि आदेश के अनुपालन के लिए निष्पादन वाद (Execution Case) दाखिल किया जा सकता है।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 71 और 72 के तहत आयोग के आदेश की अवहेलना करने पर दंड का प्रावधान है। धारा 72 के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम दो वर्ष तक के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
45 दिनों में अपील का प्रावधान
जिला उपभोक्ता आयोग के निर्णय से असंतुष्ट पक्ष को भी कानून में अपील का अधिकार दिया गया है। निर्धारित शर्तों के तहत जिला आयोग के आदेश के विरुद्ध 45 दिनों के भीतर राज्य उपभोक्ता आयोग, पटना में अपील दायर की जा सकती है।
उपभोक्ताओं के लिए जरूरी बातें
• खरीदारी का बिल और भुगतान का प्रमाण जरूर रखें।
• ऑनलाइन ऑर्डर की स्क्रीनशॉट और डिलीवरी संबंधी जानकारी सुरक्षित रखें।
• पैकेट खोलते समय फोटो या वीडियो बनाना उपयोगी हो सकता है।
• कंपनी या सेवा प्रदाता से की गई शिकायत का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
• विवाद होने पर निर्धारित समय सीमा के भीतर उपभोक्ता आयोग में परिवाद दाखिल करें।
• आयोग के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर निष्पादन वाद की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

