
नल-जल योजना ठप, एक किलोमीटर दूर से पानी ढो रहे ग्रामीण; बूंद-बूंद पानी को तरसे लोग।
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दरभंगा: जिले के बहादुरपुर प्रखंड में प्रशासनिक उदासीनता और नल-जल योजना के कथित रूप से समुचित रखरखाव नहीं होने के कारण पेयजल संकट गंभीर होता जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण प्रखंड क्षेत्र के उघरा पंचायत के वार्ड नंबर 11 में देखने को मिल रहा है, जहां ग्रामीण पिछले कई दिनों से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नल-जल योजना के तहत घरों तक नल तो पहुंचाए गए, लेकिन नियमित रखरखाव के अभाव में योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, गांव में लगा पानी का मोटर जल जाने के बाद पिछले करीब एक सप्ताह से नल-जल की आपूर्ति बाधित है। वहीं, कुछ ग्रामीणों ने बताया कि उनके घरों में करीब 15 दिनों से पानी की नियमित आपूर्ति नहीं हो रही है। पानी के लिए लोगों को आधा से एक किलोमीटर तक दूर जाना पड़ रहा है। भीषण गर्मी और जलस्तर में कमी के बीच दूर-दराज के चापाकलों और अन्य जलस्रोतों से पानी लाकर ग्रामीण किसी तरह अपनी जरूरत पूरी कर रहे हैं।
उघरा गांव निवासी गणेश झा ने बताया कि मोटर जल जाने के कारण पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप है। उम्रदराज होने और शारीरिक रूप से असमर्थ रहने के कारण उनके लिए दूर जाकर पानी लाना संभव नहीं है। ऐसे में घर की महिलाओं को दूर-दूर से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। इसी पानी से पीने, खाना बनाने, शौचालय और अन्य जरूरी घरेलू कार्य किए जा रहे हैं।
वार्ड नंबर 11 निवासी दुर्गा झा ने बताया कि गांव में पेयजल की समस्या आज की नहीं, बल्कि करीब पांच वर्षों से बनी हुई है। हालांकि इस बार स्थिति पहले से कहीं अधिक गंभीर हो गई है। उन्हें रोजाना करीब एक किलोमीटर दूर से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। पानी की कमी के कारण खाना बनाने से लेकर रोजमर्रा के घरेलू कार्य तक प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से समस्या का समाधान नहीं होने पर नाराजगी जताई।
पेयजल संकट का असर छात्रा मधु कुमारी की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि गांव में नल-जल योजना का कनेक्शन तो उपलब्ध है, लेकिन पानी नहीं आने के कारण उसका लाभ नहीं मिल रहा है। दूर से पानी ढोकर लाने के कारण उनके हाथों में सूजन हो गई है। पानी लाने और खाना बनाने में काफी समय बीत जाने के कारण कई बार स्कूल जाना भी संभव नहीं हो पाता। हाथों में सूजन के कारण कलम पकड़कर पढ़ाई करने में भी परेशानी होती है।
उघरा पंचायत निवासी युवा नेता भरत महापात्रा ने कहा कि पंचायत में कई वर्षों से पेयजल की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों ने कई बार आंदोलन और धरना देकर समस्या के समाधान की मांग की, इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि पिछले करीब एक सप्ताह से मोटर खराब होने के कारण समस्या और गंभीर हो गई है।
भरत महापात्रा के अनुसार, मोटर खराब होने की जानकारी संबंधित अधिकारियों को कई बार दी गई है। अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने पर आज-कल कहकर मामले को टाल दिया जाता है। जनप्रतिनिधियों से भी कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि पूरे उघरा पंचायत में पेयजल की स्थिति भयावह है। लोगों को एक-एक बूंद पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है और कई परिवारों को आधा से एक किलोमीटर दूर जाकर पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार पानी ढोने का सबसे अधिक असर महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। कई महिलाएं पानी ढोते-ढोते बीमार हो चुकी हैं, जबकि बुजुर्गों के लिए दूर से पानी लाना और स्नान जैसी जरूरी गतिविधियां भी मुश्किल हो गई हैं। ग्रामीणों के अनुसार, इस समस्या को लेकर कई बार पत्राचार, फोन और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से शिकायत की गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला।
ग्रामीणों ने प्रशासन से खराब मोटर को तत्काल ठीक कराने, नल-जल योजना की आपूर्ति बहाल करने और उघरा पंचायत में पेयजल संकट के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द पानी की आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर हो सकती है।

