Home Featured फर्जी प्रमाणपत्र के आरोप में शिक्षक को सात दिन में जवाब देने का आदेश, समय सीमा बीतने के बाद भी कारवाई लंबित!

फर्जी प्रमाणपत्र के आरोप में शिक्षक को सात दिन में जवाब देने का आदेश, समय सीमा बीतने के बाद भी कारवाई लंबित!

दरभंगा: जिले के बेनीपुर प्रखंड में एक विशिष्ट शिक्षक की नियुक्ति से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में शिक्षा विभाग की ओर से जारी स्पष्टीकरण पत्र की निर्धारित समय-सीमा समाप्त हो चुकी है, लेकिन अब तक सेवा समाप्ति की कार्रवाई नहीं होने का मामला सामने आया है। विभागीय पत्र में संबंधित शिक्षक को सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने और आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया था।

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मामला बेनीपुर के मध्य विद्यालय घरोड़ा में कार्यरत विशिष्ट शिक्षक ओम प्रकाश पटवा, पिता शत्रुघ्न प्रसाद पटवा से संबंधित है। जिला शिक्षा पदाधिकारी, दरभंगा के कार्यालय से जारी पत्र में उनके नियोजन से संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं।

पत्र के अनुसार, 13 जुलाई 2026 को प्रखंड शिक्षक नियोजन इकाई, बेनीपुर के कार्यपालक पदाधिकारी-सह-सदस्य सचिव की ओर से संबंधित शिक्षक के नियोजन के संबंध में प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया था। इसके पूर्व प्रमंडलीय आयुक्त-सह-प्रथम अपीलीय प्राधिकार, दरभंगा के समक्ष दायर अपील की सुनवाई के दौरान दिए गए निर्देशों के अनुपालन में भी मामले की जांच की गई थी।

आवेदन में अंक अलग-अलग होने का आरोप

विभागीय पत्र में उल्लेख किया गया है कि जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि नियोजन के समय मूल आवेदन-पत्र में अंक काट-छांट कर नियोजन इकाई को आवेदन-पत्र समर्पित किया गया था। पत्र में कहा गया है कि श्री ओम प्रकाश पटवा ने मैट्रिक में द्वितीय श्रेणी (2nd Division) तथा इंटर में तृतीय श्रेणी (3rd Division) से उत्तीर्ण होने का उल्लेख किया था, जबकि आवेदन-पत्र में इंटर में तृतीय श्रेणी के स्थान पर प्रथम श्रेणी के 68 प्रतिशत अंक दर्ज कर आवेदन किया गया था।

प्रखंड शिक्षक नियोजन इकाई, बेनीपुर की ओर से उपलब्ध कराए गए संबंधित पत्र और संलग्न साक्ष्यों के अवलोकन के बाद विभाग ने प्रथम दृष्टया माना कि नियोजन प्राप्त करने में जालसाजी किए जाने की संभावना है।

सात दिन में मांगा गया था स्पष्टीकरण

इसी आधार पर जिला शिक्षा पदाधिकारी के पत्र में बिहार विद्यालय विशिष्ट शिक्षक (संशोधन) नियमावली-2024 की कंडिका-11.5 का हवाला देते हुए संबंधित शिक्षक को स्पष्टीकरण का अवसर दिया गया।

पत्र में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया था कि सात दिनों के अंदर सभी साक्ष्यों के साथ अपना स्पष्टीकरण अधोहस्ताक्षरी कार्यालय को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें और यह बताएं कि लगाए गए आरोपों के तहत उनकी सेवा समाप्ति की कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।

पत्र में यह भी चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर संतोषप्रद स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होने की स्थिति में एकपक्षीय निर्णय लेते हुए सेवा समाप्त कर दी जाएगी।

23 जुलाई तक थी समय सीमा, 9 अगस्त तक कार्रवाई का इंतजार

पत्र पर दर्ज तारीख 16 जुलाई 2026 है। इस हिसाब से सात दिनों की निर्धारित समय-सीमा 23 जुलाई 2026 तक समाप्त हो गई। अब 9 अगस्त 2026 हो चुका है, यानी निर्धारित समय-सीमा बीते करीब 17 दिन हो चुके हैं।

इसके बावजूद संबंधित शिक्षक के विरुद्ध सेवा समाप्ति की कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खासकर तब, जब विभागीय पत्र में स्वयं यह कहा गया था कि समय-सीमा के भीतर संतोषप्रद स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर एकपक्षीय निर्णय लेते हुए सेवा समाप्त की जाएगी।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित शिक्षक की ओर से निर्धारित अवधि में कोई स्पष्टीकरण अथवा दस्तावेज विभाग को उपलब्ध कराया गया है या नहीं और यदि उपलब्ध कराया गया है तो उस पर विभागीय स्तर पर क्या निर्णय लिया गया है।

विभागीय कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निर्धारित सात दिनों में संतोषप्रद स्पष्टीकरण नहीं मिला है, तो विभागीय पत्र में दिए गए निर्देश के अनुसार अब तक सेवा समाप्ति अथवा अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

वहीं, यदि शिक्षक ने समय-सीमा के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत किया है तो उस स्पष्टीकरण पर विभाग ने क्या निर्णय लिया, यह भी सार्वजनिक किया जाना अपेक्षित है।

शिक्षा विभाग के आधिकारिक पत्र में नियोजन प्रक्रिया में दस्तावेजों में कथित हेरफेर और जालसाजी का उल्लेख होने के कारण मामला गंभीर माना जा रहा है। ऐसे में अब निगाहें जिला शिक्षा विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं।

नोट: यह समाचार उपलब्ध विभागीय पत्र में दर्ज आरोपों और निर्देशों पर आधारित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही मानी जाएगी।

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