
10 साल में दिखेगी आरक्षण की सार्थकता’, पूर्व विधायक अमरनाथ गामी ने सुझाया आरक्षण का मॉडल।
दरभंगा: पूर्व विधायक अमरनाथ गामी ने आरक्षण व्यवस्था में सुधार को लेकर एक व्यावहारिक मॉडल लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आरक्षण का वास्तविक लाभ समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए आय आधारित और पारदर्शी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।

अमरनाथ गामी ने अपने सुझाव में कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के गरीब परिवारों को पहली प्राथमिकता दी जाए। दो लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले परिवारों के बच्चों को मैट्रिक तक सरकारी हॉस्टल में रखकर निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए। वहीं, दो से आठ लाख रुपये तक की आय वाले परिवारों के बच्चों को भी आय के क्रम में प्राथमिकता देते हुए मैट्रिक तक मुफ्त शिक्षा तथा मांग के आधार पर हॉस्टल की सुविधा दी जाए।

उन्होंने कहा कि OBC, EBC और सामान्य वर्ग के गरीब परिवारों के बच्चों को भी इसी तरह की शैक्षणिक सुविधा मिलनी चाहिए। हालांकि, इन वर्गों को वर्तमान में मिल रहा आरक्षण प्रतिशत जारी रखा जाए।
गामी ने कहा कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था जारी रहनी चाहिए और SC/ST वर्ग को पहली प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही मेरिट से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। उनका सुझाव है कि आरक्षण का लाभ पहले सबसे निचले आरक्षित वर्ग, फिर OBC और उसके बाद सामान्य वर्ग के गरीब लोगों तक क्रमबद्ध तरीके से पहुंचे।
क्लास-4 की नौकरियों को लेकर उन्होंने प्रतियोगिता परीक्षा के स्थान पर डिग्री के आधार पर आरक्षित सीटों को सीधे भरने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि इससे इस स्तर की नियुक्तियों में प्रक्रिया को सरल बनाया जा सकता है।
राजनीतिक आरक्षण के संबंध में पूर्व विधायक ने कहा कि एक बार चुने जा चुके व्यक्ति या परिवार को दोबारा उसी अवसर का लाभ नहीं मिलना चाहिए, ताकि रोटेशन के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को प्रतिनिधित्व का मौका मिल सके।
उन्होंने जनगणना में स्व-संपत्ति घोषणा का एक अलग कॉलम शामिल करने का भी सुझाव दिया। उनका कहना है कि आठ लाख रुपये से कम आय वाली श्रेणी का लाभ लेने वालों से शपथ-पत्र लिया जाए, ताकि फर्जी तरीके से लाभ लेने पर रोक लगाई जा सके।
गामी ने कमजोर आय वर्ग के लोगों की सुरक्षा को लेकर भी कानूनी संरक्षण की मांग की। उन्होंने कहा कि इन वर्गों के लोगों के साथ जोर-जुल्म होने पर उन्हें पूर्ण कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए।
उन्होंने सरकार से आरक्षण व्यवस्था में बदलाव को लेकर जनमत संग्रह कराने की मांग की। साथ ही विपक्ष को साथ लेकर सभी वर्गों के विद्वानों को उनके आरक्षण अनुपात के अनुसार समिति में शामिल कर व्यापक विचार-विमर्श के बाद कानून बनाने का सुझाव दिया।
परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता पर जोर देते हुए गामी ने कहा कि परीक्षाएं पूरी तरह कदाचार-मुक्त होनी चाहिए। विद्यार्थी को अगले वर्ग में तभी प्रमोट किया जाए, जब वह परीक्षा में सफल हो। असफल होने पर उसे उसी कक्षा में रहकर दोबारा पढ़ाई करने का अवसर दिया जाए।
अमरनाथ गामी ने कहा कि उनका सुझाव किसी वर्ग के विरोध में नहीं है, बल्कि सभी को साथ लेकर समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति को पहले मजबूत करने की दिशा में है। उन्होंने दावा किया कि यदि ऐसी व्यवस्था लागू की जाती है तो अगले दस वर्षों में आरक्षण की सार्थकता जमीन पर दिखाई दे सकती है और समाज तथा देश को इसका व्यापक लाभ मिलेगा।

