Home Featured दरभंगा व्यवहार न्यायालय में फर्जी आई-कार्ड लगाकर एमटीएस का प्रशिक्षण लेने वाले दो युवक गिरफ्तार, एपीपी भी हिरासत में।
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दरभंगा व्यवहार न्यायालय में फर्जी आई-कार्ड लगाकर एमटीएस का प्रशिक्षण लेने वाले दो युवक गिरफ्तार, एपीपी भी हिरासत में।

दरभंगा: व्यवहार न्यायालय परिसर में फर्जी पहचान पत्र लगाकर एमटीएस (मल्टी टास्किंग स्टाफ) पद का प्रशिक्षण लेने के आरोप में दो युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं, दोनों युवकों को प्रशिक्षण देने के आरोप में एक एपीपी (सहायक सरकारी वकील) को भी हिरासत में लिया गया है। पुलिस की यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई जांच-पड़ताल के बाद हुई। मामले को लेकर लहेरियासराय थाना में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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प्रभारी सदर एसडीपीओ एस. के. सुमन ने बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि व्यवहार न्यायालय परिसर में कुछ लोग फर्जी आई-कार्ड का उपयोग कर एमटीएस पद के लिए प्रशिक्षण ले रहे हैं। सूचना में यह भी बताया गया था कि एक एपीपी द्वारा उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय परिसर में जांच शुरू की।

पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर प्रशिक्षण ले रहे युवकों से पूछताछ की और उनके पास मौजूद पहचान पत्र तथा अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच की। जांच के दौरान दो युवक प्रशिक्षण लेते पाए गए। उनकी पहचान विकास कुमार यादव और मनोज कुमार के रूप में हुई। वहीं, उन्हें प्रशिक्षण देने वाले एपीपी की पहचान अशोक कुमार के रूप में की गई।

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पुलिस द्वारा दोनों युवकों के आई-कार्ड और अन्य दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। संबंधित निर्गत प्राधिकारी और न्यायालय प्रशासन से जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि उक्त आई-कार्ड और दस्तावेज उनकी ओर से जारी नहीं किए गए थे। प्रारंभिक जांच में पहचान पत्र फर्जी पाए जाने के बाद पुलिस ने दोनों युवकों के साथ एपीपी अशोक कुमार को भी हिरासत में ले लिया।

इस संबंध में लहेरियासराय थाना कांड संख्या 450/26 दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर इस फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का भी पता लगाया जा रहा है।

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प्रभारी सदर एसडीपीओ ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ के दौरान यह जानकारी सामने आई है कि दोनों युवक पिछले करीब एक सप्ताह से व्यवहार न्यायालय परिसर में प्रशिक्षण ले रहे थे। हालांकि, यह प्रशिक्षण किस आधार पर और किन लोगों की जानकारी अथवा सहयोग से चल रहा था, इसकी जांच की जा रही है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी आई-कार्ड किसने तैयार किए, इन्हें किस माध्यम से उपलब्ध कराया गया और आरोपियों को न्यायालय परिसर में प्रशिक्षण लेने की सुविधा कैसे मिली। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि इस मामले में किसी संगठित गिरोह या अन्य लोगों की भूमिका तो नहीं है।

एसडीपीओ ने कहा कि मामले का अनुसंधान जारी है। जांच के दौरान जो भी व्यक्ति इस फर्जीवाड़े में संलिप्त पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अन्य संभावित आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए भी प्रयास कर रही है।

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