
दरभंगा में दो साल में 3.68 करोड़ रुपये के यातायात चालान, वॉयस ऑफ दरभंगा की पड़ताल से चौंकाने वाले आंकड़े आए सामने।
दरभंगा: जिले में यातायात नियमों का उल्लंघन अब महंगा साबित हो रहा है। वॉयस ऑफ दरभंगा की गहन पड़ताल से खुलासा हुआ है कि पिछले दो सालों में कुल 3.68 करोड़ रुपये के चालान जारी किए गए। यह आंकड़ा न केवल ट्रैफिक नियमों की अनदेखी को दर्शाता है, बल्कि प्रशासन की सख्ती को भी उजागर करता है।

वॉयस ऑफ दरभंगा की पड़ताल के दौरान प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में 1.47 करोड़ 32 हजार 800 रुपये के चालान काटे गए। अगले साल 2025 में यह राशि बढ़कर 1.88 करोड़ 33 हजार 700 रुपये हो गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। वर्ष 2026 का पहला महीना जनवरी भी पीछे नहीं रहा-इस दौरान ही 32 लाख 51 हजार रुपये के चालान जारी हो चुके हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि यातायात उल्लंघनों में कोई कमी नहीं आ रही, बल्कि समय के साथ बढ़ोतरी हो रही है।

पड़ताल में यह भी सामने आया कि सरकारी वाहनों पर भी चालान की कोई ढील नहीं दी जाती। गाड़ी नंबर के आधार पर ही चालान काटा जाता है, चाहे वह किसी विभाग, कर्मचारी या अधिकारी का वाहन ही क्यों न हो। हालांकि, संबंधित व्यक्ति का नाम या पदनाम रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया जाता, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित करने में कुछ चुनौतियां बनी रहती हैं। जिले के यातायात विभाग ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और नियमों का पालन सभी पर समान रूप से लागू होता है।

चालान प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन जमा का विकल्प उपलब्ध है। विभाग के अनुसार, यदि चालान में कोई तकनीकी गलती हो, तो उसे सुधारने का प्रावधान मौजूद है। लेकिन सही पाए गए चालान पर माफी का कोई विकल्प नहीं है। संशोधित धाराओं के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है, जिसमें जुर्माने के अलावा वाहन जब्ती या अन्य सख्त कदम भी शामिल हो सकते हैं।
ये आंकड़े दरभंगा के व्यस्त चौराहों, मुख्य सड़कों और बाजार क्षेत्रों में बढ़ते ट्रैफिक उल्लंघनों की कहानी बयान करते हैं। हेलमेट न पहनना, तेज गति से वाहन चलाना, सिग्नल तोड़ना और गलत पार्किंग जैसे सामान्य उल्लंघन ही इन चालानों का प्रमुख कारण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी रिकवरी से न केवल सरकारी खजाने को मजबूती मिल रही है, बल्कि सड़क सुरक्षा में भी सुधार हो सकता है। फिर भी, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चालान कटने के बाद जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाने की जरूरत है।

वॉयस ऑफ दरभंगा की यह पड़ताल यातायात नियमों के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास है। क्या जिले में चालान की यह बाढ़ सड़क दुर्घटनाओं को रोक पाएगी? आने वाले दिनों में आंकड़ों पर नजर रखी जा रही है।

