
पानी के लिए तरसते बच्चों की समस्या अफसरों ने भी मानी, फिर भी पत्राचार तक सिमटा समाधान!
वॉयस ऑफ दरभंगा की खबर के बाद विद्यालय पहुंचकर अधिकारियों ने देखी हकीकत, BEO ने DEO को दी जानकारी; DEO और BDO ने PHED को लिखा पत्र, लेकिन चापाकल अब भी खराब
दरभंगा: बहादुरपुर प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय अकौना, इंदिरा आवास परिसर में पेयजल के लिए परेशान बच्चों की समस्या को लेकर वॉयस ऑफ दरभंगा की खबर का असर हुआ। खबर सामने आने के बाद अधिकारियों ने विद्यालय का निरीक्षण किया और बच्चों की पेयजल समस्या को गंभीरता से स्वीकार किया। लेकिन विडंबना यह है कि समस्या की पुष्टि होने और कई स्तरों से पत्र लिखे जाने के बावजूद समाधान अब तक जमीन पर नहीं उतर सका है।

विद्यालय की प्रधान शिक्षल ने पहले ही आवेदन देकर अधिकारियों को बताया था कि विद्यालय परिसर का चापाकल जर्जर होकर खराब हो चुका है। इसके कारण विद्यालय में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चों और शिक्षकों के सामने पेयजल का संकट बना हुआ है। बच्चों को बिना पेयजल के विद्यालय में रहने में काफी परेशानी हो रही है।
खबर प्रकाशित होने के बाद प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी ने विद्यालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सामने आई स्थिति के बाद प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने पूरे मामले से जिला शिक्षा पदाधिकारी, दरभंगा को अवगत कराया।

इसके बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी ने PHED के कार्यपालक अभियंता को पत्र लिखकर प्राथमिक विद्यालय अकौना में चापाकल/समरसेबल अधिष्ठापित कराने का अनुरोध किया। पत्र में विद्यालय में पेयजल की गंभीर समस्या का उल्लेख करते हुए जल्द समाधान की जरूरत बताई गई।

वहीं, प्रखंड विकास पदाधिकारी, बहादुरपुर ने भी PHED के कनीय अभियंता को पत्र भेजकर विद्यालय परिसर में जल्द चापाकल अधिष्ठापन सुनिश्चित करने को कहा।
अफसरों ने समस्या मानी, लेकिन बच्चों को पानी कब मिलेगा?
मामला अब एक-दो नहीं, बल्कि कई सरकारी पत्रों से गुजर चुका है। विद्यालय ने समस्या बताई, अधिकारियों ने निरीक्षण किया, BEO ने DEO को रिपोर्ट दी, DEO ने PHED के कार्यपालक अभियंता को पत्र लिखा और BDO ने कनीय अभियंता को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा।
लेकिन सवाल अब भी वही है—आखिर बच्चों को पानी कब मिलेगा?
कागजों पर समस्या स्वीकार कर ली गई, कार्रवाई के निर्देश भी जारी हो गए, लेकिन धरातल पर बच्चों की प्यास नहीं बुझी। सरकारी तंत्र में पत्राचार का सिलसिला जारी है, जबकि विद्यालय के बच्चे आज भी पेयजल की सुविधा का इंतजार कर रहे हैं।
वॉयस ऑफ दरभंगा की खबर के बाद अधिकारियों की सक्रियता ने यह तो साबित कर दिया कि विद्यालय की समस्या वास्तविक है, लेकिन अब जरूरत पत्राचार की नहीं, बल्कि तत्काल धरातलीय कार्रवाई की है।

