Home Featured साहित्य से समाज के व्यवहारों को निखारने में मिलती है मदद : कुलपति।
4 weeks ago

साहित्य से समाज के व्यवहारों को निखारने में मिलती है मदद : कुलपति।

दरभंगा: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के मैथिली विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन करते हुए कुलपति प्रो. सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि साहित्य यदि समाज के व्यवहारों को निखारने में सक्षम न हो तो रचना व्यर्थ है। उन्होंने कहा कि साहित्य कितना प्रेरणादायक होता है, उसका कौन-कौन शब्द अपने ध्वनि के माध्यम से किस प्रकार मानवीय संवेदनाओं को झंकृत करती है यह कहना असंभव है।

वहीं कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शशिनाथ झा ने बतौर मुख्य अतिथि ने विद्यापति रचित कीर्तिलता एवं कीर्तिपताका के साथ मध्यकालीन मैथिली के कुछ नाटकों को भी प्रबंध काव्य माना। वहीं विशिष्ट अतिथि प्रतिकुलपति प्रो. डौली सिन्हा ने मैथिली को बहुत ही कर्णप्रिय एवं समृद्ध भाषा बताया। विभाग के वरीय शिक्षक प्रो. रमण झा ने बीज भाषण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संकायाध्यक्ष और मैथिली विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रीती झा ने की।

कार्यक्रम का संचालन प्रो. नारायण झा ने किया। इस मौके पर प्रो. दमन कुमार झा, प्रो. अशोक कुमार मेहता, डॉ. अरविंद सिंह झा, डॉ. अजीत मिश्र, डॉ. अरूण कुमार ठाकुर, डॉ. अरविंद झा, डॉ. अजीत चौधरी, सुरेन्द्र भारद्वाज, रागिनी रंजन, अभिलाषा, डॉ. सत्येंद्र कुमार झा, प्रवीण कुमार झा, राजनाथ पंडित, सोनी कुमारी, विष्णु प्रसाद, विद्याचंद्र झा आदि ने भाग लिया।

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