Home Featured संस्कृत साहित्य के सेवन से चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति संभव : प्रो० शशिनाथ।
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संस्कृत साहित्य के सेवन से चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति संभव : प्रो० शशिनाथ।

दरभंगा: साहित्य और विज्ञान में कोई विरोध नहीं है। संस्कृत विश्व की पूर्णतः वैज्ञानिक एवं सर्वाधिक ध्वनीप्रिय भाषा है।

जो हमारे शरीर एवं वातावरण को पवित्र करती है। इसमें जो बोला जाता है, वही लिखा और सुना जाता है। वेद,पुराण व साहित्य से ही आइडियाज लेकर लोग आज भी विज्ञान में आगे बढ़ रहे हैं। उक्त बातें मिथिला विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रो० डोली सिन्हा ने विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग के तत्वावधान में “संस्कृत साहित्य में मानव के समग्र विकास की अवधारणा” विषयक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा।

उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं को लोगों के बीच प्रचारित-प्रसारित किया जाना चाहिए तथा साहित्य में हुए शोधों का लाभ समाज को मिले। ऐसे प्रासंगिक विषयों पर संगोष्ठी का आयोजन वृहद स्तर पर होना चाहिए।

मुख्य अतिथि के रूप में संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० शशिनाथ झा ने कहा कि विकास अनेक रूपों में होता है। संस्कृत साहित्य में आचार पालन पर बल दिया गया है।

संस्कृत साहित्य के सेवन से चारों पुरुषार्थों- धर्म,अर्थ,काम तथा मोक्ष की प्राप्ति संभव है। इस परिवर्तनशील एवं विकासशील संसार में संस्कृत की काफी महत्ता रही है। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, तिरुपति के पूर्व शिक्षा संकायाध्यक्ष प्रो० राधाकांत ठाकुर ने कहा कि सेमिनार का विषय बहु उपयोगी है। सिर्फ पुस्तकों के अध्ययन से मानव का समग्र विकास संभव नहीं है।

मिथिला अपने संस्कृत साहित्य एवं दर्शन के लिए प्रसिद्ध रहा है। संस्कृत साहित्य हमें सकारात्मक रूप से जीवन में आगे बढ़ने की सीख देता है। संस्कृत में प्रेरक साहित्य की बहुलता है, जिनसे समाज प्रेरित होता है। संस्कृत के बिना हमारा ज्ञान अधूरा है।

दीनदयाल उपाध्याय महाविद्यालय, दिल्ली के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ० राधा माधव भारद्वाज ने कहा कि संस्कृत साहित्य में मानव विकास की सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। संस्कृत साहित्य के कारण ही हमारी सभ्यताएं जीवंत हैं और भारत विश्व को बहुत कुछ दे रहा है। संस्कृत साहित्य के अध्ययन से हमें अनंत सुख की प्राप्ति होती है। यह हमें आत्मसाक्षात्कार कर ब्रह्म-प्राप्ति की राह दिखलाता है।

संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अध्यक्ष डॉ० अशोक कुमार झा, मानविकी संकायाध्यक्षा प्रो० प्रीति झा, प्रो० अमरनाथ झा, प्रो० रमण झा, प्रो० रामनाथ सिंह, डॉ ० आरएन चौरसिया, डॉ० विकास कुमार, डॉ ० शशिकांत पांडे सहित 70 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिन्हें सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।

विषय प्रवर्तन करते हुए विभागीय प्राध्यापक डॉ० जयशंकर झा ने कहा संस्कृत साहित्य के अध्ययन से पूरी मानवता का कल्याण तथा समग्र विकास होगा। कार्यक्रम का प्रारंभ वैदिक एवं पौराणिक मंगलाचरण से हुआ। आगत अतिथियों का स्वागत पाग,चादर तथा पुष्प-माला से किया गया। संगोष्ठी में गत 31 जनवरी को अवकाश ग्रहण करने वाले विभागीय प्राध्यापक डॉ ० रामनाथ सिंह तथा उनकी धर्मपत्नी वीणा कुमारी का सम्मान पाग,चादर तथा बुके आदि से किया गया।

सीएम कॉलेज के संस्कृत प्राध्यापक डॉ ० संजीत कुमार झा के संचालन में आयोजित उद्घाटन सत्र में आगत अतिथियों का स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो जीवानंद झा ने किया,जबकि धन्यवाद ज्ञापन मारवाड़ी महाविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ ० विकास कुमार ने किया।

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