Home Featured चिता पर मंदिर स्थापित होने के वाबजूद भी श्यामा मंदिर में होते है सभी तरह के मांगलिक कार्य।
1 week ago

चिता पर मंदिर स्थापित होने के वाबजूद भी श्यामा मंदिर में होते है सभी तरह के मांगलिक कार्य।

दरभंगा: हिंदु धर्म शास्त्र के मुताबिक जब किसी भी व्यक्ति का कोई मांगलिक कार्य होता है तो वह एक वर्ष तक श्मशान नहीं जाता है। परंतु दरभंगा महाराज के किला के भीतर माधवेश्वर परिसर में अवस्थित मां श्यामा काली का भव्य मंदिर पूरे मिथिलांचल का यह एक इकलौता ऐसा मंदिर है जो चिता पर स्थापित है। इसके बावजूद भी यहां सभी तरह की मांगलिक कार्य होते है।

इस मंदिर में वैसे तो सालों भर भक्तों का आना लगा रहता है। लेकिन नवरात्रा में मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ यह साबित करती है कि मां श्यामा पर भक्तों का कितना विश्वास व आस्था है।

मां काली की यह मंदिर दरभंगा राज परिवार के महाराज रामेश्वर सिंह की चिता पर स्थापित है। इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1933 ई. में हुई थी। मंदिर के गर्भ गृह की शुचिता की सुरक्षा के लिए प्रवेश द्वार के सम्मुख मजबूत घेरा बनाया हुआ है। माता के मंदिर का गर्भ गृह काफी विस्तृत , ऊचा, प्रकाशयुक्त एवं पवित्र है। गर्भ गृह के मध्य श्वेत स्फटिक की भगवान शिव का विशाल प्रतिमा श्यनमुद्रा में धरती पर लेटा हुआ है तथा शिवजी के बाये हाथ में डमरू, कमर में व्याघ्रचर्म, गले में मणिधर नाग और शीष पर बनी नाग देवता का छत्र शिव की मूर्ति को अलौकिक बनाती है। भूमि पर श्वेत शिव की प्रतिमा के वक्ष पर मां श्याम काली अपने दोनों चरण दिये खड़ी है।

इतिहासकारों का कहना है कि यह मूर्ति पेरिस से बनकर आयी थी। जगकर्ता भगवान शिव के वक्ष पर आरूढ़ मां श्यामा काली के चरणों की दर्शन से भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है। माता के अंग पर मनोरम रक्तिम या पीत वस्त्र रहती है। मां काली की यह प्रतिमा चार भुजाओ वाली है। दाहिना हाथ हमेशा आये हुए शरणागत भक्तों को आशीष देती है। अधो बाम हस्त में नर मुंड और ऊपर के बाए हाथ में खड्ग है। इस मंदिर में मां काली की पूजा तांत्रिक और वैदिक दोनों विधि से की जाती है।

चिता पर बसे होने के वाबजूद यहां नवविवाहित जोड़े आशीर्वाद लेने तो पहुंचते ही है, साथ ही इस मंदिर में लग्न के समय कई जोड़े मां को साक्षी मान इसी मंदिर परिसर में परिणय सूत्र में बंध जाते है। यहां सालो भर आसपास के स्थानीय लोगों के साथ ही देश विदेश के लोगो का आना जाना लगा रहता है। इस मंदिर में चारो नवरात्रा मनाई जाती है। पूरे मंदिर परिसर में हमेशा चहल पहल बनी रहती है और जय श्यामा माई की जयघोष से वातावरण गुंजयमान रहता है।

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