Home Featured दूध पिलाने वाली महिलाओं को समुचित आहार दिया जाना अति आवश्यक: डॉ0 सीमा प्रसाद।
June 7, 2022

दूध पिलाने वाली महिलाओं को समुचित आहार दिया जाना अति आवश्यक: डॉ0 सीमा प्रसाद।

दरभंगा: दरभंगा चिकित्सा महाविद्यालय के स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग में मंगलवार को यूनिसेफ और नालंदा मेडिकल कॉलेज के पोषण केंद्र के सौजन्य से मां (मदर्स एब्सलूट अफेक्शन) कार्यक्रम के तहत एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में दरभंगा मेडिकल कॉलेज की 26 नर्सिंग स्टाफ ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ सीमा प्रसाद ने कहा कि बच्चों के पोषण और उनके विकास के लिए आवश्यक है कि इसके लिए न सिर्फ गर्भवती महिलाओं को समुचित आहार देने की व्यवस्था करनी है, बल्कि जन्म के तुरंत बाद बच्चे को मां की  दूध पिलाना चाहिए। बच्चों को 6 माह के बाद मां के दूध के साथ घर का पौष्टिक आहार भी देना है। साथ ही उन्हें मां का दूध 2 साल या उससे ज्यादा पिलाती है तो दूध पिलाने वाली महिलाओं को समुचित आहार दिया जाना अति आवश्यक है।

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डॉ माया शंकर प्रसाद ने बताया कि गर्भवती महिला को गर्भावस्था के तीसरे- चौथे महीने में ही स्तन में दूध आ जाता है। अतः जन्म के समय दूध नहीं उतरना एक मिथ है। आवश्यकता सिर्फ बच्चे को तुरंत छाती लगाने की है, जिससे कि दूध का सतत प्रवाह जारी रहे।

कार्यक्रम में प्रशिक्षक के रूप में यूनिसेफ के डॉ राघवेंद्र कुमार एवं फैयाज अहमद के साथ शिशु रोग विभाग के डॉ ओम प्रकाश ने भाग लिया। कार्यक्रम में ऑडियो वीडियो के माध्यम से स्तनपान और 2 साल के नीचे के बच्चों के आहार पर आईवाईसीएफ के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी  गई। प्रशिक्षणार्थियों में पुतुल, माला, रेखा, आदि शामिल हुई।

समापन सत्र में डॉ ओमप्रकाश ने सभी प्रशिक्षणार्थियों से संकल्प लेने को कहा कि वह मरीजों को दाइओं के भरोसे नहीं छोड़ेंगी और सभी प्रसूताओं को आईवाईसीएफ (जन्म के तुरंत बाद से ही छह मास की उम्र तक सिर्फ और संपूर्ण स्तनपान एवं 6 माह के बाद 2 साल के बच्चों को मां के दूध के साथ घर का भोजन) का लाभ देना सुनिश्चित करेंगे।

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