Home Featured डीएम ने दिलाई सड़क सुरक्षा की शपथ।
December 9, 2022

डीएम ने दिलाई सड़क सुरक्षा की शपथ।

दरभंगा: स्थानीय दरभंगा प्रेक्षागृह, लहेरियासराय में दैनिक जागरण द्वारा आयोजित सड़क सुरक्षा शपथ ग्रहण कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी श्री राजीव रौशन के कर-कमलों से दीप प्रज्जवलित कर किया गया।

इस अवसर पर जिला परिषद् अध्यक्ष रेणु देवी, जिला परिषद् उपाध्यक्ष ललिता झा, जिला परिवहन पदाधिकारी राजेश कुमार ने दिप प्रज्ज्वलन में सहयोग किया।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि सड़क सुरक्षा का विषय हमारे जीवन और हमारे असिस्त्व से जुड़ा विषय है। इस गंभीर विषय पर चर्चा के लिए कार्यक्रम आयोजित करने के लिए उन्होंने दैनिक जागरण के प्रति आभार प्रकट किया।

उन्होंने कहा कि किसी भी क्रांतिकारी बदलाव के लिए चिंतन और मंथन जरूरी है और इसमें हमारी नई पीढ़ी का सबसे ज्यादा योगदान होगा। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति घर से बाहर निकलता है, तो उसके परिवार के सदस्यों को चिंता रहती है कि वह शाम को  सुरक्षित लौटकर घर आए। दुर्घटना में परिवार के मुखिया की जीवन क्षति किसी परिवार की बहुत बड़ी क्षति होती है।

उन्होंने कहा कि दुर्घटना से होने वाली मृत्यु का आँकड़ा भयावह है, जैसा कि बताया गया  कि 1.5 लाख लोगों की मृत्यु प्रतिवर्ष भारत में सड़क दुर्घटना में होती है, यह आँकड़ा कोविड जैसे घातक महामारी से भी बड़ी है।

उन्होंने कहा कि वाहन एकाग्रचिंत होकर अनुशासित होकर तथा यातायात के नियमों का पालन करते हुए नियंत्रित रफ़्तार में चलाना चाहिए, वाहन चलाते समय मस्तिष्क में कोई अन्य विचार नहीं आना चाहिए ।

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उन्होंने कहा कि बिहार में मद्यनिषेध लागू है, नशा करके वाहन चलाने से मस्तिष्क को किसी आकस्मिक घटना के प्रति प्रतिक्रिया करने का समय लम्बा होता है, व्यक्ति तुरंत निर्णय नहीं ले पाता है।

दुर्घटना के उपरान्त दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के लिए वह आधे घण्टे का समय जीवन दायनी होता है, यदि उस आधे घण्टे के अंदर कोई उसे निकट के अस्पताल में पहुँचा दें। अन्यथा दुर्घटना के उपरान्त देर तक शरीर से रक्त निकलने के कारण शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और व्यक्ति का जीवन समाप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को मदद करने वाले से अब पुलिस द्वारा विशेष पुछताछ नहीं की जाती है। साथ ही उनकी समाज में प्रतिष्ठा बढ़ती है, उन्हें सरकार के स्तर से भी पुरस्कृत किया जाता है। उन्होंने भारत के एक बड़े व्यवसायी साइरस मिस्त्री की दुर्घटना का उदाहरण देते हुए बताया कि उस दुर्घटना के जो तथ्य उभर कर आए उनमें 100 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक की रफ्तार से वाहन चलना, शीट बेल्ट नहीं लगाना रहा है।

उन्होंने कहा कि मानव मस्तिष्क को निर्णय लेने का समय अवधि की एक सीमा होती है, यदि आप अधिक तेज रफ्तार से गाड़ी चला रहे हैं, तो अचानक किसी घटना के प्रति आपका मस्तिक निर्णय नहीं ले पाता है, । यदि आप अपने वाहन का रफ्तार नियंत्रित रखते हैं तो आपको किसी घटना के समय निर्णय लेने के लिए आपके पास पर्याप्त समय रहता है।

उन्होंने प्रेक्षागृह में मौजूद बच्चों से कहा कि जिस तरह से परिस्थितियाँ बदल रही हैं, उसमें नई पीढ़ी को आगे आना होगा। वाहन का कम से कम प्रयोग हो, इस पर भी चिंतन, मंथन करना होगा।

उन्होंने नई पीढ़ी को एक शेर समर्पित करते हुए कहा कि – ‘‘मनु नहीं मुन पुत्र हैं ये सामने, जिनकी कल्पना की जीभ में भी धार होती है, बाण ही नहीं होते, विचारों के केवल, स्वप्न के हाथों में भी तलवार होती है’’।

उन्होंने नई पीढ़ी को इस समस्या पर चिंतन करने एवं समाधान खोजने हेतु आह्वान किया। उन्होंने गुगल मैप की तरह नई तकनीक के अविष्कार करने की जरूरत बताई, ताकि सड़क सुरक्षा के दृष्टिकोण से सड़क पर यातायात को नियत्रित करें। इसके लिए पब्लिक ट्रासपोर्ट सिस्टम को बेहतर करने की जरूरत होगी, ताकि केवल एक व्यक्ति अपने आवागमन के लिए चार पहिया वाहन का प्रयोग न करें।

उन्होंने दिल्ली मैट्रो ओर मुम्बई शेयरिंग टैक्सी का उदाहरण दिया कि जिसके कारण वहां वाहनों की संख्या सड़क पर कम हुई है। उन्होंने कहा कि कई मल्टीनेशनल/नेशनल कम्पनियों ने अपने कर्मियों के लिए यह व्यवस्था कर रखी है कि वे घर बैठे ही अपना काम कर सकते है, इससे भी वाहनों की संख्या कम होती है और इससे हमारी उत्पादकता भी बढ़ती है।

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उन्होंने बड़ी संस्थाओं को अपना स्थान विस्तरित(विकेंद्रीकरण) करने की पहल करने की जरूरत बताई, ताकि उस संस्थान से जुड़ा कार्य अन्य स्थलों पर भी सम्पन्न किया जा सके।इससे दुर दराज  के लोगों को अपने काम के लिए सिर्फ एक ही जगह जाने की आवश्यकता न पड़े, बल्कि नजदीक में ही उस संस्था का अतरिक्त केन्द्र में इसका समाधान हो जाए। इससे भी वाहनों की संख्या में कमी होगी।

उन्होंने कहा कि हम सड़क सुरक्षा पर बातें करते हैं, श्लोगन लिखते हैं, लेकिन सड़क पर अपनाते नहीं हैं, हमें यातायात के नियमों का पालन करने के साथ धैर्य भी रखना होगा। प्रायः सड़क पर आगे बढ़ने की होड़ में यातायात के नियमों की अनदेखी की जाती है, जिसके कारण जाम लग जाता है और जो दूरी 02 मिनट में तय हो सकती थी, उसके लिए 10 मिनट विलंब हो जाता है।

उन्होंने कहा कि यातायात के नियमों का अनुपालन करने के लिए यह आवश्यक नहीं की कोई हमें कहे तब हम उसका अनुपालन करें। उन्होंने कहा कि हमें अपने वाहनों को भी समय-समय पर वाहन प्रदूषण जाँच/सर्विसिंग कराते रहने की जरूरत है। इसके साथ ही सड़क को भी दुरूस्त रखने की जरूरत है। ब्लैक स्पॉट पर रिफ्लेक्टर लगाने की जरूरत है।

उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित सभी को सड़क सुरक्षा की शपथ दिलाई कि ‘‘मैं शपथ लेता हूँ कि सड़क पर वाहन चलाने से पहले सभी सुरक्षा संबंधी बातों पर ध्यान रखूंगा, यातायात नियमों का स्वंय और अपने स्वजनों से पालन कराऊंगा, दो पहिया वाहन चलाते समय सदा हेलमेट पहनूंगा, कार चलाते समय सदा सीट बेल्ट लगाऊंगा, कभी भी शराब पीकर गाड़ी नहीं चलाऊंगा, वाहन चलाते समय कभी भी मोबाईल फोन पर बान नहीं करूंगा, मैं हमेशा एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड गाड़ियों को पहले जाने के लिए रास्ता दूंगा, सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने के लिए सदैव तत्पर रहूंगा……………….जय हिन्द, जय भारत’’

इस अवसर पर जिला परिवहन पदाधिकारी राजेश कुमार द्वारा यातायात से संबंधित नियमों को बताया गया। उन्होंने कहा कि हेलमेट पहनकर ही मोटर साईकिल चलाना चाहिए, चार पहिया वाहन चलाते समय सीट बैल्ट का प्रयोग करना चाहिए ।जिला परिषद् अध्यक्ष रेणु देवी ने बच्चों से कहा कि आप अपने अभिभावक को धैर्य के साथ नियंत्रित गति में गाड़ी चलाने का अनुरोध करें।

अनुमण्डल पुलिस पदाधिकारी सदर अमित कुमार ने कहा कि शिक्षित वर्ग के लोग भी हेलमैट लगाने से परहेज करते हैं और उनकी सुरक्षा, उनकी परिवार की खुशी बरकरार रखने के लिए हमें जुर्माना करना पड़ता है। उन्होंने बच्चों से कहा कि आप अपने माता-पिता को यातायात के नियमों का पालन करने हेतु प्रोत्साहित करें, वे घर से निकले तो गाड़ी की रफ्तार की सीमा पर ध्यान रखें। प्रत्येक वाहन चलाने वाला यदि स्वंय जिम्मेदार हो जाए तो दुर्घटना की संख्या बहुत कम हो जाएगी।

जिला परिषद् उपाध्यक्ष ललिता झा ने बच्चों से कहा कि आप अपने अभिभावक को धैर्य से गाड़ी चलाने, यातायात के नियमों का पालन करने के लिए अनुरोध करें।

उपनिदेशक, जन सम्पर्क नागेन्द्र कुमार गुप्ता ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि यातायात के नियम हम सभी जानते हैं, सड़क बनाने वाली एजेंसियों ने भी सड़क पर संकेतक बनाये है। लेकिन, इसका उपयोग हम नहीं करते है, आगे निकलने की होड़ में यातायात के नियमों का उल्लंघन करते हैं, जिसके कारण दुर्घटना होती है और जीवन क्षति होती है, जिसके परिणाम आपको जीवन भर स्वंय भुगतना पड़ता है। आपके परिजन, आपसे जुड़े लोग प्रभावित होते है।

उन्होंने कहा कि सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष 1.55 लाख लोगों की सड़क दुर्घटना से मृत्यु होती है। इसका विश्लेषण हम करें, तो प्रतिदिन 426 और प्रतिघंटा 18 लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटना से होती है।

उन्होंने कहा कि हम संयम अपनाकर यातायात के नियमों का पालन कर, इसमें कमी ला सकते हैं।

इस अवसर पर माउण्ट समर कन्वेंट के बच्चों द्वारा स्वागत गान प्रस्तुत किया गया।

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