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May 11, 2023

उत्तर भारतीय संगीत की विभिन्न गायन शैलियां विषयक एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन।

दरभंगा। महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह मेमोरियल महाविद्यालय के संगीत विभाग द्वारा गुरुवार को ‘उत्तर भारतीय संगीत की विभिन्न गायन शैलियां’ विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसका उदघाटन सत्र की मुख्य वक्ता प्रो लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’, विशिष्ट वक्ता डाॅ. अम्बरीष चंचल, महाविद्यालय के संस्थापक डाॅ.बैद्यनाथ चौधरी बैजू,आइ क्यू ए सी समन्वयक डाॅ. विनोद कुमार मिश्र, प्राचार्य डाॅ. शम्भू कुमार यादव, संयोजक डाॅ. चन्द्रनाथ मिश्र और आयोजन सचिव डाॅ. ममता रानी ठाकुर द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इसके बाद महाविद्यालय की छात्राओं ने मंगलाचरण और स्वागत गीत प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डाॅ. बैजू ने दरभंगा की सांगीतिक पृष्ठभूमि को रखते हुए संगोष्ठी के आयोजन की सराहना की। इसके बाद मुख्य वक्ता प्रो लावण्य कीर्ति सिंह ने विस्तारपूर्वक संगोष्ठी का विषय – प्रवर्तन किया और गायन की विभिन्न विधाओं को प्रस्तुत किया। उदघाटन सत्र के मध्य में राष्ट्रीय संगोष्ठी के अवसर पर प्रकाशित स्मारिका का विमोचन मंचस्थ अतिथियों द्वारा किया गया। संगोष्ठी के विशिष्ट वक्ता ने अपने सम्भाषण में सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए संगीत के आरम्भिक स्वरूप की चर्चा  करते हुए उत्तर भारतीय संगीत की विभिन्न गायन शैलियों सर्वप्रथम राग अहिरभैरव में बड़ा ख्याल ‘बनरा मोरा’  और मध्यलय ‘ध्यान लगो’ की गायकी प्रस्तुत किया।

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इसके बाद राग सारंग और पूरिया धनाश्री में छोटा ख्याल का उदाहरण देने के बाद उपशास्त्रीय गायन की विधा ठुमरी के अन्तर्गत ‘मोरा सैंया भए परदेशी’ का गायन किया। इसके क्रम से दादरा, भजन ( ऊॅ जै अम्बे गौरी), गणेश वन्दना के बाद दो गजल (अबके हम बिछड़ें तो शायद कभी ख्वाबों में मिलें और दिल न मिलते तो मुलाकात अधूरी रहती ) भी प्रस्तुत किया। संगोष्ठी के उदघाटन सत्र की अध्यक्षता प्राचार्य डाॅ. शम्भू कुमार यादव ने की और इस संगोष्ठी के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए इस आयोजन को सार्थक और सफल बताया।

संगोष्ठी में आगत अतिथियों का स्वागत संयोजक डाॅ. चन्द्रनाथ मिश्र ने तथा धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव डाॅ. ममता रानी ठाकुर ने किया। संचालन हिन्दी के विद्वान प्राध्यापक डाॅ सतीश कुमार सिंह ने किया।

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