Home Featured सामाजिक पहल पर दस दिनों बाद गरीब पशुपालक को वापस मिली उनकी खो चुकी चार भैंसे।
3 weeks ago

सामाजिक पहल पर दस दिनों बाद गरीब पशुपालक को वापस मिली उनकी खो चुकी चार भैंसे।

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दरभंगा:एक पशुपालक केलिए उसकी सबसे बड़ी पूँजी उसके पशु होते हैं। उसमे भी जब उसके पूरे परिवार का भरण पोषण उसी पशु पर निर्भर हो और पशु खो जाए तो उसके स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। और जब खोने के बाद दस दिनों बाद पुनः वापस मिल जाये तो खुशी का ठिकाना नही रहता।
ऐसा ही एक वाकया सामने आया है बहादुरपुर थाना क्षेत्र के सिनुआरा गांव का जहां के पशुपापलक किसान चंदर कहार की चार भैंसे लगभग दस दिन पहले चारा चरने के दौरान खो गयी थी। काफी खोजबीन के बाद सोमवार को ग्यारहवें दिन भैसों की घर वापसी हो पायी है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए पशुपालक श्री कहार ने बताया कि दस दिन पहले उनका पुत्र भैंस चराने गया था। बीच मे भैंस को चरते छोड़कर उनका पुत्र खाना खाने आया। भैंस को चराना नियमित दिनचर्या था और भैंस कभी भटकती नही थी। पर उसदिन वापस जाने पर भैंसे नही मिली।
इसके बाद भैंस की खोजबीन शुरू हुई। खोजबीन के दौरान काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगह लोग बच्चा चोर समझ कर भी घेर लिए थे। खोजबीन के थक हार चुके थे। तब उन्होंने इसकी सूचना अपने ग्रामीण सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णकांत चौधरी उर्फ़ कन्हैया को दी। श्री चौधरी ने अपने स्तर से खोजबीन शुरू करवायी तो उन्हें किसी से जानकारी मिली कि सिमरी थाना क्षेत्र के माधोपुर गांव निवासी दामोदर राम के यहां चार भैंसे हैं। श्री चौधरी ने यह सूचना चंदर कहार को दी। इसके बाद श्री कहार तीन लोगों के साथ रविवार को माधोपुर पहुँचे। वहाँ उनके भैसों की पहचान हो गयी। पता चला कि पिछले चार दिनों से दामोदर राम ने तीनों भाइयों के साथ मिलकर भैसों को बांध रखा था। भैंसों को वापस करने के एवज में दामोदार राम एवं उनके एक भाई दो दो हजार की मांग किये। जबकि एक भाई पारी को यूं ही वापस करने को तैयार हो गए। परंतु श्री कहार के पास केवल 1500 रुपये थे। अतः उनसे भैंसे वापस नही मिली। श्री कहार वहीं पंचायत भवन पर रात में साथियों सहित रुक गए। अगले दिन पुनः वार्ता शुरू हुई तो दामोदर राम की तरफ से पांच हजार की डिमांड की जाने लगी। तब श्री कहार के ग्रामीण कृष्णकांत चौधरी ने बनौली निवासी चर्चित मानवाधिकार कार्यकर्ता सुरेंद्र भगत से संपर्क किया और खुद भी माधोपुर पहुँचे। मध्यस्ता का प्रयास शुरू हुआ और श्री कहार 3500 देने को तैयार हो गए। अंततः मामला सुलझा और 3500 क भुगतान कर श्री कहार को भैंसे वापस मिली।
भैंस वापस लेकर चंदर कहार जैसे ही घर पहुंचे, उनके घर पर उत्सव जैसा माहौल हो गया। घर की महिलाएं और बच्चों के चेहरे पर खुशी देखते ही बनती थी। दस दिनों से ठीक से किसी ने खाना पीना नही खाया था। भैंसों के मिल जाने पर परिवार के लोग ऐसे लिपट रहे थे जैसे उनके परिवार का महत्वपूर्ण सदस्य खो गया हो और वापस आया हो। श्री कहार ने सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णकांत चौधरी और मानवाधिकार कार्यकर्ता सुरेंद्र भगत को विशेष रूप से धन्यवाद दिया।

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