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2 weeks ago

दो जन्म प्रमाणपत्रों के बीच घण्टों अटकी रही शादी।

दरभंगा: जिले के सिंहवाड़ा प्रखण्ड में एक विवाह के दौरान लड़की के बालिग एवं नाबालिग होने का मामला इसप्रकार उलझ कि इसके कारण शादी घण्टो रुकी रही। दो तरह के जन्म प्रमाणपत्र सामने आने के कारण मामला उलझा रहा। प्रशासन ने जैसे ही ओके किया, गांव के सीमान से चलकर सनहपुर गांव में लड़की वाले के घर बाजे गाजे के साथ बारात आ गई। बीडीओ सिद्धार्थ कुमार, सिंहवाड़ा थानाध्यक्ष अमित कुमार, मुखिया अमृत कुमार चौरसिया सहित कई गणमान्य लोग घंटों इस विवाह के भविष्य पर चर्चा करते रहे।
विवाह के लिए पंडाल, भोजन व्यवस्था, मड़वा आदि की व्यवस्थाएं पूर्व से तैयार थी। बारात आने के बाद धूमधाम से विवाह संपन्न हुआ। अब लड़की के बालिग या नाबालिक होने के संबंध में जन्म प्रमाण पत्रों की जांच की जा रही है। बताया गया है कि चाइल्ड लाइन के टोल फ्री नंबर 1098 पर किसी ने फोन कर सनहपुर माध्यमिक विद्यालय के नौमा कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिक लड़की की शादी 28 जून को होने की सूचना दी थी। सूचना मिलते ही चाइल्ड लाइन के प्रखंड समन्वयक मनोहर कुमार झा बाकी सदस्यों के साथ मामले की जांच के लिए मौके पर पहुंच गए। सनहपुर हाई स्कूल के एचएम सुनील कुमार से मिले पत्र के अनुसार लड़की की जन्म तिथि 8 जुलाई 2004 थी।
चाइल्डलाइन ने नाबालिक लड़की के शादी होने संबंधी सूचना एसडीओ को दी। एसडीओ से मिले आदेश के अनुसार प्रशासन सक्रिय हो गया। थानाध्यक्ष, बीडीओ सहित कई अधिकारी मौके पर पहुंच गए। बीडीओ के सामने लड़की वाले ने म्युनिसिपल कारपोरेशन दरभंगा की ओर से 18 जून 20 को निर्गत प्रमाण पत्र पेश किया। जिसके अनुसार लड़की की जन्म तिथि 7 जून 2001 है। दोनों जन्म प्रमाण पत्र में अंतर देख लड़की का आधार कार्ड देखा गया। जिसमें जन्मतिथि 2001 अंकित पाई गई। इसी जांच के दौरान बारात गांव तक आ गई। काफी जद्दोजहद के बाद अधिकारियों ने लड़की के बालिग होने की बात कह शादी की अनुमति दे दी। अनुमति मिलते ही बारात पहुंची और विवाह संपन्न हो गया।
चाइल्ड लाइन के प्रखंड समन्वयक मनोहर कुमार ने बताया कि बाल विवाह को सम्पन्न कराने केलिए नगर निगम दरभंगा से 18 जून 2020 को एक जन्म प्रमाणपत्र बनवा लिया गया। आधार कार्ड को अपडेट कर जन्म तिथि बदल दी गई है। विद्यालय द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र को प्रखण्ड प्रशासन द्वारा अनदेखा कर विवाह की मौखिक अनुमति प्रदान कर दी गयी, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने बताया कि दोनों जन्म प्रमाण पत्र की जांच के लिए सहायक निदेशक बाल संरक्षण इकाई एवं बाल संरक्षण समिति को प्रतिवेदन भेजा है।

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