Home Featured शहर के पुराने मुख्य नाले को ही खोजकर वास्तविक स्वरूप में ले आये प्रशासन तो दूर हो जाएगा जलजमाव: गामी।
October 1, 2019

शहर के पुराने मुख्य नाले को ही खोजकर वास्तविक स्वरूप में ले आये प्रशासन तो दूर हो जाएगा जलजमाव: गामी।

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दरभंगा: पहले इससे ज्यादा बारिश होती थी पर जलजमाव नही होता था। परंतु आज वर्षा कम हो रहा है और जलजमाव की समस्या बढ़ती गयी। पहले आबादी कम थी और उसकी अपेक्षा में नालों का साइज ज्यादा चौड़ा था। मुख्य नाला 20 फीट चौड़ा और 10 फीट गहरा था। सपोर्टिंग नाला 10 फीट चौड़ा और 5 फीट गहरा होता था जिसमे घरो के नाले आकर मिलते थे। पानी आसानी से निकल जाता था। परंतु आबादी बढ़ने के बाद नाला का साइज छोटा करके नाली बन गया और जलनिकासी अवरुद्ध हो गया। किसी का इस तरफ ध्यान नही है कि इसका स्थायी समाधान कैसे हो। बस शार्ट टर्म हो हल्ला हो जाता है, फिर बारिश खत्म और समस्या खत्म।
उपरोक्त बातें सोमवार को एक अनौपचारिक बातचीत के दौरान हायाघाट के जदयू विधायक अमरनाथ गामी ने कही। उन्होंने कहा कि दरभंगा शहर में जलजमाव केलिए सरकार की नीति जिम्मेवार है। सरकार की कोई स्पष्ट नीति ही नही है स्थायी समाधान केलिए। अगर स्थानीय प्रतिनिधि चाहते तो बड़े शहरों की तरह नगर निगम के माध्यम से उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम अंडरग्राउंड नाले का प्रोजेक्ट बनवा कर सरकार के पास भेजते और स्वीकृत करवाते। चूंकि यह प्रोजेक्ट बड़ा होगा इसलिए नगर निगम की क्षमता के बाहर है। इस शहर के चारो तरफ नदी बहती है, जो जल प्रबंधन केलिए सर्वाधिक उपयुक्त है। साथ ही साथ उन्होंने कहा कि मीडिया को केवल जलजमाव नही दिखा कर, जहां जहां नाला अवरुद्ध किया है और पुराने नाले का साइज छोटा कर दिया गया है, उसे भी दिखाना चाहिए और सरकार को संज्ञान में दिलाना चाहिए। उसे भी पुनः जागृत करने से समस्या कम हो सकती है। जिला प्रशासन और नगर निगम नए दिशाहीन नाले बनाने में पैसा बर्बाद कर रही है। जबकि पुराने मुख्य नाले एवं सपोर्टिंग नाले की खोज कर उसे अतिक्रमण मुक्त करवाये और उसी से घरों की नालियों को जोड़ दे तो बहुत हद तक जलजमाव की समस्या खत्म हो जाएगी।
इस बारिश को प्राकृतिक आपदा मानने से साफ इंकार करते हुए उन्होंने कहा कि पहले इससे कहीं ज्यादा बारिश हुआ करती थी। 15-15 दिनों और महीने भर तक बारिश भी का बरसना लगातार लगा रहता था। लोग घरों में जलावन और सूखे सब्जी का भंडार भी रखते थे। पर उस समय भी जलजमाव नही होता था। हाल के वर्षो में लगातार बारिश कम होता गया है। फिर भी जलजमाव बढ़ता गया है। जब बारिश पहले की अपेक्षा कम होता गया है तो इसे प्राकृतिक आपदा कैसे मान लें!
किसानों केलिए इस वर्षा को खुशहाली का संकेत बताते हुए कहा कि हथिया नक्षत्र यदि बरस रहा है तो निश्चित रूप से किसानो केलिए उत्सव मनाने का समय है। मातम सरकार अपने द्वारा इसे समस्या बना लेने पर मनाये।
साथ ही श्री गामी ने कहा कि जनता को भी भूलने की आदत है। बारिश के समय हो हल्ला होता है। जनता के पैसे की बर्बादी प्रशासन द्वारा जलनिकासी के तात्कालिक व्यवस्था पर की जाती है और फिर बारिश बन्द तो जलजमाव खत्म। जलजमाव खत्म तो फिर अगले बरसात तक समस्या खत्म। स्थायी निदान का चर्चा भी खत्म।
इस समस्या के स्थायी निदान केलिए उन्होंने आमजन से भी आग्रह करते हुए कहा कि आज सोशल मीडिया का जमाना है, आमलोग भी निगम से लेकर राज्य सरकार और केंद्र सरकार तक विभिन्न एपों एवं सोशल साइट्स के माध्यम से इस समस्या को लगातार दर्ज करवाएं तो निश्चित रूप से संज्ञान हो सकता है और समाधान निकल सकता है।

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