दुष्कर्म केस में बीस साल की सजा काट रहे युवक को कोर्ट ने किया रिहा, तीन पुलिसकर्मी निलंबित।
दरभंगा: जिले के बहेड़ा थाना के एक की झूठे दुष्कर्म केस में बीस साल की सजा काट रहे मुकेश कुमार को पटना हाईकोर्ट ने बरी कर दिया। गुरुवार को वह दरभंगा जेल से रिहा हुआ। अब इस मामले में लापरवाही बरतने वाले तीन पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। डीजीपी विनय कुमार ने तत्कालीन डीएसपी, थानाध्यक्ष और अनुसंधानक को सस्पेंड करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला दरभंगा जिले के बहेड़ा थाना कांड संख्या 282/20 से जुड़ा है। मुकेश को आठ अगस्त 2020 को नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 29 नवंबर 2023 को दरभंगा पॉक्सो कोर्ट ने उसे दोषी मानते हुए 20 साल की सजा सुनाई थी।

लेकिन पटना हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 28 नवंबर 2024 को उसे दोषमुक्त करार दिया। उमेश्वर चौधरी। इस मामले में तत्कालीन बेनीपुर एसडीपीओ उमेश्वर चौधरी, बहेड़ा थानाध्यक्ष सुनील कुमार और अनुसंधानक जावेद आलम दोषी पाए गए हैं। उमेश्वर चौधरी वर्तमान में डीएसपी पालीगंज टू हैं। सुनील कुमार मधुबनी में पदस्थापित हैं। जावेद आलम सारण जिले के अवतारनगर थाना में तैनात हैं। डीजीपी के निर्देश पर एसएसपी जगुनाथ रेड्डी ने मधुबनी और सारण के एसपी को इन अधिकारियों को निलंबित करने को कहा है। मुकेश के परिवार ने सामाजिक कार्यकर्ता रवींद्रनाथ सिंह से मदद मांगी थी।
उन्होंने अधिवक्ता ओम प्रकाश के जरिए पटना हाईकोर्ट में अपील दायर की। न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार और राजेश वर्मा की खंडपीठ ने तेजी से सुनवाई कर मुकेश को बरी कर दिया। अब मुकेश को न्याय मिला है। परिवार ने राहत की सांस ली है। जांच में स्पष्ट हुआ कि मुकेश को झूठे केस में फंसाया गया था। केस के अनुसंधानक जावेद आलम ने हाईकोर्ट में बताया कि मुकेश निर्दोष है। असली दोषी उसी गांव का दिनेश कुमार है। लेकिन वरीय अधिकारियों के दबाव में मुकेश के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया।

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