Home Featured वित्त समिति की बैठक में डिजिटल प्लेटफॉर्म के निर्माण की दी गयी स्वीकृति।
2 weeks ago

वित्त समिति की बैठक में डिजिटल प्लेटफॉर्म के निर्माण की दी गयी स्वीकृति।

दरभंगा: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय की वित्त समिति की बैठक बुधवार को कुलपति प्रो. एसपी सिंह की अध्यक्षता में हुई। बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में गत 23 मार्च की बैठक के कार्यवृत्त की सम्पुष्टि हुई एवं सात जुलाई की क्रय-विक्रय समिति के कार्यवृत्त को स्वीकृति प्रदान की गई। 19 जून के विद्वत परिषद के अन्यान्य मद एक के अन्तर्गत डिजिटल प्लेटफॉर्म के निर्माण की भी स्वीकृति दी गई क्योंकि कोविड काल में ऑनलाइन क्लास के साथ-साथ रेकार्डिंग स्टूडियो, डिजिटल लाइब्रेरी, ईआरपी जैसी आधारभूत संरचनाओं का निर्माण होना आवश्यक है।

सभी सदस्यों ने भी इसका स्वागत किया। वित्त समिति के सदस्य गोपाल चौधरी, प्रो. नारायण झा, श्याम सुन्दर विश्वकर्मा और अरविन्द कुमार सिंह ने शिक्षकों द्वारा कॉपी जांच की दर को बढ़ाने एवं उन्हें ठहराव भत्ता देने का प्रश्न उठाया। कुलपति ने उनकी मांग पर सहमति जताते हुए आगामी बैठक में विस्तृत ब्योरे के साथ इस मद पर चर्चा करने की बात कही। आउटसोर्स कर्मियों का मानदेय बढ़ाने का मामला भी अगामी बैठक में लाने को कहा गया। समिति के सदस्य गोपाल चौधरी ने कॉलेजों में ऑडिट और कॉलेज के आंतरिक स्रोत का 70 प्रतिशत वेतन पर खर्च करने का मुद्दा उठाया।

बैठक में सदस्य प्रो. नारायण झा, गोपाल चौधरी, श्याम सुन्दर विश्वकर्मा, कैलाश राम तथा वित्तीय परामर्शी एवं कुलसचिव प्रो. मुश्ताक अहमद मौजूद थे। इस दौरान पत्रकारों को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य यह है कि छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मियों के हितों की रक्षा की जाय एवं कार्यप्रणाली में पारदर्शिता एवं स्वच्छता दिखाई देना चाहिए। मैं अपने इस कर्तव्य के निर्वहन के लिए हमेशा सचेत रहता हूं।

प्रो. सिंह ने कहा कि हम विश्वविद्यालय एवं राज्य सरकार के नियमों, परिनियमों, अधिनियमों और समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा जारी निर्देशों से बंधे हुए हैं इसलिए यदि किसी कार्य में देरी होती है तो इसका अन्यथा अर्थ नहीं लिया जाना चाहिए। विवि किसी के मान्य एवं उचित देय में किसी प्रकार की कठनाई नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी 50वीं वर्षगांठ और ललित बाबू की सौवीं जयंती मना रहा है। इसलिए विश्वविद्यालय में शैक्षणिक एवं विकासोन्मुख कार्यों की रूपरेखा तय की गई है। कुछ काम शुरू हो चुका है और कुछ काम हो चुके हैं। वित्त समिति के सदस्यों के प्रति उन्होंने आभार व्यक्त किया कि इनका सार्थक सहयोग मिल रहा है।

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