Home Featured पटना रेफर के बजाय DMCH में ही ऑपरेशन के अधीक्षक के निर्णय को डॉक्टरों ने किया फलीभूत, बची युवती की जान।
3 weeks ago

पटना रेफर के बजाय DMCH में ही ऑपरेशन के अधीक्षक के निर्णय को डॉक्टरों ने किया फलीभूत, बची युवती की जान।

दरभंगा: उत्तर बिहार के सबसे बड़े अस्पताल डीएमसीएच अस्तपाल में न तो अनुभवी डॉक्टरों का अभाव है और न ही संसाधनों का। बस जरूरत है तो सही समन्वय और इच्छाशक्ति की। यदि वास्तव में इच्छाशक्ति हो तो जो कार्य बड़े बडे निजी नर्सिंग होम में नही हो सकता, वह डीएमसीएच के डॉक्टर कर दिखाते हैं। कुछ ऐसा ही मामला एकबार पुनः डीएमसीएच में देखने को मिला है। अधीक्षक डॉ हरिशंकर मिश्रा द्वारा एक 15 वर्षीय युवती को पटना रेफर न करके डीएमसीएच में ही ऑपरेशन के निर्णय को डॉक्टरों ने सही साबित कर दिखाया और युवती की जान बच गयी।

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दअरसल, फंदे पर लटक कर किशोरी ने खुदकुशी का प्रयास किया था। शरीर में थोड़ी सी हरकत बची देख परिजन उसे बुधवार की देर रात लेकर डीएमसीएच पहुंचे थे। फंदे पर लटकने से उसकी गर्दन की कार्टिलेज टूट चुकी थी। रात करीब दो बजे किशोरी के लाए जाने की सूचना अधीक्षक डॉ हरिशंकर मिश्रा को दी गई। चिकित्सकों ने उन्हें बताया कि जटिल ऑपरेशन करना पड़ेगा। इस तरह के ऑपरेशन की सुविधा यहां नहीं है। हालांकि गरीब परिजनों की ओर से गुहार लगाई जाने पर डॉक्टरों ने अधीक्षक से बात की। अधीक्षक द्वारा भी सहमति मिल जाने के बाद डॉक्टरों ने उसे पटना रेफर करने का इरादा छोड़ यहीं ऑपरेशन की तैयारी शुरू की। तुरंत डॉक्टरों की टीम गठित की और उसका का इलाज शुरू हुआ। अस्पताल के मेडिसिन आईसीयू में जगह रहनी रहने पर महीनों से बंद करोना आईसीयू का ताला खोला गया।

एनेस्थीसिया और ईएनटी ने छह घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद उसकी जान बचा ली। डॉक्टरों की टीम में एनेस्थिसिया विभागाध्यक्ष डॉ हरि दामोदर सिंह के अलावा ईएनटी विभाग के डॉ हेमंत कुमार, डॉ आदिल अख्तर, डॉ श्वेता कुमारी और एनिथीशिया विभाग के डॉ रविन्द्र कुमार, डॉ भुवनेश्वर कुमार के अलावा पीजी डॉ राजीव रंजन शामिल थे। इसप्रकार अंततः पटना रेफर करने के बजाय यहीं कठिन ऑपरेशन कर किशोरी की जान बचाई गई।

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अधीक्षक ने बताया की किशोरी की हालत में सुधार हो रहा है। उसका ऑक्सीजन लेवल भी बढ़ रहा है। पटना रेफर करने पर उसकी जान जा सकती थी।

इस सफलता के विषय मे जिसने सुना, सबने यही कहा कि डॉक्टरों का यही हौसला बरकरार रहे तो सैकड़ों मरीजों को पटना रेफर करने के बजाय यहीं नई जिंदगी दी जा सकती है। किशोरी की जान बचाने को किए गए प्रयास से अब यही उम्मीद बंधी है।

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