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5 days ago

लापरवाही या मिलीभगत: पुलिस अभिरक्षा से नाबालिग लड़की के गायब होने के बाद उठ रहे हैं सवाल!

दरभंगा: दरभंगा में इन दिनों पुलिस की कार्यशैली किसी से छिपी नही है। दिनदहाड़े लूट की घटना हो या थाना के सामने चोरी हो, पुलिस सिवाय लकीर पीटने के कुछ नही कर पाती। पुलिसिंग की अचानक ऐसी दुर्दशा हाल के दिनों में अधिकारियों के तबादले के बाद से सामने आयी है। पुलिस अपराधियों को पकड़ नही पाती या वास्तव में पकड़ना ही नही चाहती, अब यह भी सवाल उठना लाजिमी हो गया है।

ताजा मामला शहर के नगर थाना क्षेत्र का सामने आया है, जहां पुलिस अभिरक्षा से एक नाबालिग लड़की गायब हो गयी। उक्त लड़की के गायब होने की जो कहानी महिला पुलिसकर्मी द्वारा दर्ज प्राथमिकी में दर्शायी गयी है, उसके मुताबिक पुलिस की कार्यशैली बेहद लालपरवाही वाली हो गयी है। यदि बेहद लापरवाही पूर्ण रवैये के कारण अपहृता गायब नही हुई है तो दूसरा पक्ष कहीं न कहीं पुलिस की मिलीभगत को इंगित करता भी नजर आता है।

दरअसल, नगर थाना में महिला हेल्प डेस्क मे प्रतिनियुक्त सिपाही श्वेता कुमारी द्वारा एक अगस्त को एफआईआर 209/22 दर्ज कराई गयी है। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार कांड संख्या 155/22 जो पोस्को एक्ट एवं आईपीसी के धाराओं के तहत दर्ज किया गया था, इस मामले की अपहृता एक नाबालिग लड़की थी। उक्त नाबालिग लड़की ने 29 जुलाई को कोर्ट में समर्पण किया था। 30 जुलाई को नाबालिग का 164 का बयान और मेडिकल जांच कराया गया। इसके बाद उसे नगर थाना पर पुलिस अभिरक्षा में महिला बैरक में रखा गया था। 31 जुलाई को आगे की प्रक्रिया के लिए उसे कोर्ट ले जाना था, पर इससे पहले वह गायब हो गई। प्राथमिकी के अनुसार महिला सिपाही खाना खा कर हाथ धोने चापाकाल पर गई और जब वापस आई तो नाबालिग अपहृता गायब हो गई। दर्ज प्राथमिकी में किसी के द्वारा पुनः भगाकर ले जाने की आशंका भी जतायी गयी है।

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अब सवाल यह उठता है कि किसी अभिरक्षा में रखी गयी लड़की को केवल एक महिला सिपाही के भरोसे थानाध्यक्ष ने कैसे छोड़ दिया! क्या बैरक में केवल एक ही महिला सिपाही थी! यदि कोई उसे भगाकर ले गया तो क्या थाना परिसर इतना असुरक्षित है कि कोई भी आकर किसी अभिरक्षा में रखी गयी लड़की को लेकर भाग जाए! एक और सवाल यह भी कि जब नाबालिग ने कोर्ट में खुद सरेंडर किया तो फिर वह भागी क्यों!

सवाल तो बहुत सारे हैं, पर जवाब दो ही सामने दिख रहे हैं। या तो पुलिस ने बेहद लापरवाही का परिचय दिया है, अथवा पुलिस की मिलीभगत से युवती गायब हुई है। पर सच तो तब सामने आएगा जब थाना की व्यवस्था के लिए जिम्मेवार थानाध्यक्ष एवं उक्त महिला सिपाही की भूमिका को भी जांच के घेरे में लाया जाए। पर वर्तमान पुलिसिंग और वरीय अधिकारियों के रवैये से ऐसी कोई भी संभावना दूर दूर तक नही दिखती कि इतनी बड़ी लापरवाही केलिए भी किसी थानाध्यक्ष को जांच के दायरे में लाया जाए।

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